भारत का स्वर्ण आयात रिकॉर्ड ऊंचाइयों पर
नई दिल्ली । डेस्क: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारत का स्वर्ण आयात वित्त वर्ष 2025-26 में अपने अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुँच गया है. प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए नागरिकों से 'मितव्ययिता' बरतने और सोने की खरीद को फिलहाल टालने की अपील की है.
आयात के चौंकाने वाले आंकड़े
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का स्वर्ण आयात 24 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 71.98 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. दिलचस्प बात यह है कि आयात की जाने वाली मात्रा (वॉल्यूम) में गिरावट आई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की बढ़ती कीमतों ने कुल खर्च को आसमान पर पहुंचा दिया है.
मूल्य में वृद्धि: 2024-25 में 58 अरब डॉलर से बढ़कर 71.98 अरब डॉलर.
मात्रा में कमी: 2024-25 में 757.09 टन के मुकाबले 2025-26 में यह गिरकर 721.03 टन रह गया.
कीमतों का असर: सोने की औसत कीमत वित्त वर्ष 2025 के 76,617 डॉलर/किग्रा से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 99,825 डॉलर/किग्रा हो गई है. दिल्ली में सोने के दाम 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास मंडरा रहे हैंपीएम मोदी की 'मितव्ययिता' की अपील
पश्चिम एशिया के संघर्ष से भारतीय जनता को बचाने के लिए केंद्र सरकार हर संभव प्रयास कर रही है. रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से आह्वान किया कि वे ईंधन का विवेकपूर्ण उपयोग करें और सोने की खरीद तथा विदेश यात्राओं जैसे बड़े खर्चों को कुछ समय के लिए स्थगित कर दें. सरकार का उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखना और अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाना है.
व्यापार घाटे और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
सोने का भारी आयात सीधे तौर पर भारत के व्यापार घाटे (Trade Deficit) को बढ़ा रहा है. वित्त वर्ष 2025-26 में यह घाटा बढ़कर 333.2 अरब डॉलर हो गया है. आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर तिमाही में चालू खाता घाटा (CAD) भी बढ़कर जीडीपी का 1.3 प्रतिशत (13.2 अरब डॉलर) हो गया है. भारत के कुल आयात में अकेले सोने की हिस्सेदारी 9 प्रतिशत से अधिक हैदुबई और FTAs की भूमिका पर विशेषज्ञों की चिंता
थिंक टैंक GTRI (Global Trade Research Initiative) ने सरकार को मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) की समीक्षा करने की सलाह दी है. GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, भारत-यूएई समझौते (CEPA) का फायदा उठाकर दुबई से होने वाला आयात तेजी से बढ़ा है.
अजय श्रीवास्तव ने बताया कि 2024 के बजट में आयात शुल्क घटाकर 6% करने के बाद, दुबई से सोना प्रभावी रूप से केवल 5% शुल्क पर भारत आ रहा है. चिंता की बात यह है कि यूएई स्वयं सोने का खनन नहीं करता है, फिर भी वहां से आयात 2022 के 2.9 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 16.5 अरब डॉलर हो गया है. आशंका है कि अन्य देशों का सोना केवल शुल्क बचाने के लिए दुबई के रास्ते भारत भेजा जा रहा है.निष्कर्ष और सरकारी कदम
सरकार ने पहले ही स्वर्ण, चांदी और प्लेटिनम के आयात पर अंकुश लगाने के लिए कई कदम उठाए हैं ताकि व्यापार समझौतों के दुरुपयोग को रोका जा सके. विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के व्यापार समझौतों से कीमती धातुओं को बाहर रखना और 'रूल्स ऑफ ओरिजिन' को सख्त करना देश के विदेशी मुद्रा भंडार की रक्षा के लिए अनिवार्य है.
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