भारत की आरक्षण प्रणाली सशक्तिकरण की मिसाल- ऑक्सफैम
भारत की आरक्षण प्रणाली बनी सशक्तिकरण की मिसाल- ऑक्सफैम
नई दिल्ली । डेस्क: विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक के पहले दिन जारी अपनी रिपोर्ट 'रेजिस्टिंग द रूल ऑफ द रिच' में अंतरराष्ट्रीय संस्था ऑक्सफैम ने राजनीति पर अमीर वर्ग के बढ़ते प्रभाव को लेकर आगाह किया है. रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि दुनिया भर में एक आम नागरिक की तुलना में अरबपतियों के राजनीतिक पद संभालने की संभावना 4000 गुना अधिक है.
इस बढ़ती असमानता के बीच, ऑक्सफैम ने भारत की आरक्षण प्रणाली को दुनिया के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य वंचित समूहों के लिए विधायी कोटा और हाल ही में महिलाओं के लिए घोषित 33 प्रतिशत आरक्षण ऐसे कदम हैं, जो आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े लोगों को नीति निर्माण में अपनी आवाज उठाने की ताकत देते हैं.
ऑक्सफैम ने तर्क दिया कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब 'बहुमत की शक्ति' को बढ़ावा दिया जाए.
रिपोर्ट में भारत के अलावा ब्राजील के 'पार्टिसिपेटरी बजटिंग' का भी उदाहरण दिया गया है, जहाँ नागरिक स्वयं बजट निर्माण में हिस्सा लेते हैं.
संस्था ने सरकारों से अपील की है कि वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों की रक्षा करें ताकि आम जनता और जमीनी संगठन बिना किसी डर के अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकें.
रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि जब तक राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था समावेशी नहीं होगी, तब तक सत्ता पर कुछ चुनिंदा अमीरों का कब्जा बना रहेगा, जिसे रोकने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य है.