स्वीकृत पदों पर नियुक्ति तो नियमितीकरण का हक- HC
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति स्वीकृत पदों पर नियमित चयन प्रक्रिया के माध्यम से हुई है, तो उन्हें केवल 'संविदा' (Contractual) शब्द के आधार पर नियमितिकरण से वंचित नहीं किया जा सकता.
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने सरगुजा जिले में 2012-13 से कार्यरत डेटा एंट्री ऑपरेटरों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें उनके नियमितिकरण के दावे को खारिज कर दिया गया था.
अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य एक 'आदर्श नियोक्ता' है और वह केवल शब्दावली का सहारा लेकर कर्मचारियों का हक नहीं मार सकता.
अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति विज्ञापित पदों पर पारदर्शी प्रक्रिया और दो साल की प्रोबेशन अवधि की शर्त के साथ हुई थी, जो आमतौर पर नियमित नियुक्तियों में होती है.
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 'भोला नाथ बनाम झारखंड राज्य (2026)' के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जब नियुक्तियां स्वीकृत पदों पर हों और कर्मचारी 10 साल से अधिक की निर्बाध सेवा पूरी कर चुके हों, तो उनकी स्थिति को केवल 'कॉन्ट्रैक्ट' बताकर खारिज करना 'मैकेनिकल' और मनमाना है.
हाईकोर्ट ने साफ किया कि वास्तविक अधिकारों को महज तकनीकी नामकरण के अधीन नहीं रखा जा सकता, अतः इन कर्मचारियों को नियमित सेवा का लाभ मिलना चाहिए.