राजनीतिक बयानबाजी में घसीटे जा रहे बेकसूर घोड़े और गधे
राजनैतिक बयानबाजी में घसीटे जा रहे बेकसूर घोड़े और गधे
रायपुर | संवाददाताः सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के लंगड़े घोड़े वाले बयान पर छत्तीसगढ़ में राजनीति गरमा गई है. यहां भाजपा और कांग्रेस के नेता एक दूसरे पर वार-पलटवार करने में लग गए हैं.
राहुल गांधी ने मंगलवार को भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि घोड़े तीन तरह के होते हैं. रेस के घोड़े को रेस में और बारात के घोड़े को बारात में इस्तेमाल करना चाहिए. लंगड़े घोड़े को घर बिठा देना चाहिए.
इस बयान पर अब भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने कहा है कि राहुल गांधी कोई राजनीतिक पार्टी नहीं चला रहे हैं, बल्कि ऐसा प्रतीत होता है कि वह कोई फार्म चला रहे हैं और "घोड़ों की खेती" कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की राजनीतिक स्थिति खुद लंगड़े घोड़े की तरह है. यही हाल राज्य के कांग्रेसी नेताओं का हो गया है. यहां के तमाम कांग्रेसी नेता बीमार घोड़े की तरह हैं.
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के सभी कांग्रेस नेताओं को किसी पशु फार्म में भर्ती कर देना चाहिए, जहां बीमार घोड़ों के इलाज और देखरेख के लिए अस्पताल होता है. अब वे वहीं रखने लायक हो गए हैं.
अजय चन्द्राकर ने कहा कि अंबानी ने जामनगर में वन्य जीवों की देखरेख के लिए जो 'वनतारा' बनाया है, छत्तीसगढ़ के कांग्रेसियों को वहीं भेज देना चाहिए.
अजय चन्द्राकर के इस बयान पर पलटवार करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा खुद बैसाखियों के सहारे चल रही है. हमारे घोड़ों की तुलना में भाजपा में गधों की फौज है. प्रधानमंत्री मोदी अगर रात को दिन कह दें, तो भी उनके नेता चुप रहते हैं.
इसके साथ ही दीपक बैज ने कहा कि राहुल गांधी लगातार अलग-अलग प्रदेशों का दौरा करते हैं. कांग्रेस संगठन को उन्होंने साफ कह दिया है कि हमें रेस के घोड़े चाहिए. जो तेजी से काम कर सके.
अजय चन्द्राकर के बाद स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने भी राहुल गांधी पर तंज करते हुए उन्हें घोड़ी चढ़ने की सलाह देते हुए शादी कर लेने की बात कही है.
उन्होंने कहा कि उन्हें घोड़ी में बैठकर बारात जाना चाहिए.