नक्सल क्षेत्र में ट्रांसफर पर हाई कोर्ट की राहत, विभाग 3 महीने में ले फैसला
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक पुलिस कॉन्स्टेबल को बीजापुर के नक्सल प्रभावित इलाके में किए गए उसके तबादले के खिलाफ औपचारिक आवेदन देने की अनुमति दे दी है. जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू की एकल पीठ ने 13 मार्च को याचिका का निपटारा करते हुए राज्य अधिकारियों को इस मामले में तीन महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है.
यह मामला छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (CAF) की दूसरी बटालियन में तैनात कॉन्स्टेबल दिनेश ओगरे से जुड़ा है, जिन्होंने नया रायपुर से बीजापुर जिले के मिरतुर थाना क्षेत्र स्थित बेचापुल कैंप में किए गए अपने ट्रांसफर को चुनौती दी थी.
याचिकाकर्ता के वकील अभिषेक पांडे ने तर्क दिया कि ओगरे पहले भी नक्सल विरोधी अभियानों में शामिल रहे हैं और एक मुठभेड़ के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे. चोटों का असर अभी भी उनके स्वास्थ्य पर है, जिससे उनके लिए हाई-रिस्क जोन में ड्यूटी करना चुनौतीपूर्ण है.
हालांकि, कॉन्स्टेबल ने 20 जनवरी 2026 के आदेश का पालन करते हुए नई पोस्टिंग पर ज्वाइन कर लिया है, लेकिन उन्होंने चिकित्सा और सुरक्षा आधार पर विभागीय समीक्षा की मांग की थी.
कोर्ट ने अब ओगरे को पुलिस मुख्यालय रायपुर में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) प्रशासन और ADGP (CAF) के समक्ष अपना पक्ष रखने की अनुमति दी है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि अधिकारी कॉन्स्टेबल की पुरानी चोटों को ध्यान में रखते हुए बिलासपुर के सकरी मुख्यालय में उनकी पोस्टिंग पर 90 दिनों के भीतर अंतिम फैसला लें.