गोवा क्लब अग्निकांड पर हाई कोर्ट: 25 मृतकों के परिजनों को 20-20 लाख का अतिरिक्त मुआवजा दें
अर्पोरा नाइटक्लब अग्निकांड मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने बड़ा आदेश देते हुए क्लब प्रबंधन को 25 मृतकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देने का निर्देश दिया है. अदालत ने इसे तीन किश्तों में जमा करने की अनुमति दी है और स्पष्ट किया है कि यह राशि किसी भी स्थिति में वापस नहीं होगी.
गोवा । डेस्क: अर्पोरा स्थित 'बिर्च बाय रोमियो लेन' नाइटक्लब में दिसंबर 2025 में हुए भीषण अग्निकांड में 25 लोगों की जान चली गई थी. इस त्रासदी पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने 2 नवंबर को क्लब प्रबंधन को प्रत्येक पीड़ित के परिवार के लिए 20 लाख रुपये का अतिरिक्त अनुग्रह मुआवजा जमा करने का निर्देश दिया है.
न्यायमूर्ति वाल्मीकि मेनेजेश और न्यायमूर्ति अमित एस जमसांडेकर की खंडपीठ ने 'हाई कोर्ट ऑन इट्स ओन वर्सेस स्टेट ऑफ गोवा एंड अदर्स' मामले में यह आदेश जारी किया.
यह धनराशि क्लब की भूमिगत रसोई में मारे गए 20 कर्मचारियों और आग की चपेट में आए 5 पर्यटकों के परिवारों को दी जाएगी. यह राशि पहले से दिए गए 2 लाख रुपये के तदर्थ (ad hoc) मुआवजे से अलग होगी. अदालत ने प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत भुगतान की समय-सीमा को स्वीकार कर लिया है, जिसके तहत 20 लाख रुपये प्रति पीड़ित की राशि तीन किश्तों में जमा की जाएगी.
पहली किश्त 5 लाख रुपये 16 नवंबर तक, दूसरी किश्त 5 लाख रुपये 7 दिसंबर तक और तीसरी किश्त 10 लाख रुपये 7 फरवरी 2027 तक. खंडपीठ ने यह स्पष्ट किया है कि यह अनुग्रह राशि किसी भी स्थिति में वापस नहीं की जाएगी, भले ही उपभोक्ता फोरम या कर्मकार मुआवजा अधिनियम के तहत अंतिम निर्णय में इससे कम राशि तय की जाए.
सुनवाई के दौरान पीड़ितों के विधिक सहायता वकील ने प्रति परिवार कम से कम 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी. जांच में यह बात सामने आई थी कि यह प्रतिष्ठान बिना किसी वैध भवन लाइसेंस, नगर नियोजन मंजूरी और अग्नि सुरक्षा एनओसी के एक अनधिकृत ढांचे से चलाया जा रहा था.
अदालत ने माना कि यह आपदा श्रमिकों के मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और गोवा सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती तथा उसे क्लब मालिकों के साथ जवाबदेही साझा करनी होगी.
इसके अलावा, पीठ ने गोवा की सभी ग्राम पंचायतों को पिछले पांच वर्षों में जारी की गई भवन अनुमतियों, व्यापार लाइसेंसों और एनओसी का ब्योरा देते हुए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर तय की गई है.
गोवा क्लब अग्निकांड में क्या हुआ था?
गोवा का अर्पोरा गांव उत्तरी गोवा के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में गिना जाता है, जो अपने नाइटलाइफ़ और नाइटक्लब्स के लिए जाना जाता है. इसी क्षेत्र में स्थित 'बिर्च बाय रोमियो लेन' (Birch by Romeo Lane) नाइटक्लब में दिसंबर 2025 में एक भीषण अग्निकांड हुआ, जिसने पूरे राज्य और देश को झकझोर कर रख दिया था. इस विनाशकारी दुर्घटना में कुल 25 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी.
मृतकों में क्लब की भूमिगत रसोई में काम करने वाले 20 कर्मचारी और 5 पर्यटक शामिल थे. आग इतनी तेजी से फैली कि क्लब के अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलने का अवसर ही नहीं मिला, और अधिकांश लोग दम घुटने व जलने के कारण हादसे का शिकार हो गए.
हादसे की विस्तृत जांच में कई गंभीर लापरवाही और प्रशासनिक अनियमितताएं उजागर हुईं. जांच से पता चला कि यह नाइटक्लब पूरी तरह से एक अनधिकृत और अवैध ढांचे में संचालित किया जा रहा था. इसके पास न तो कोई वैध भवन निर्माण लाइसेंस था, न ही नगर नियोजन विभाग (Town Planning) की मंजूरी और न ही अनिवार्य अग्नि सुरक्षा एनओसी (Fire Safety NOC) प्राप्त थी.
सुरक्षा मानकों की इस घोर अनदेखी और प्रशासनिक चूक को लेकर जन आक्रोश फैल गया. इस मामले पर बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने स्वतः संज्ञान लेते हुए 'हाई कोर्ट ऑन इट्स ओन वर्सेस स्टेट ऑफ गोवा एंड अदर्स' नाम से जनहित याचिका दर्ज की.
अदालत ने इस हादसे को श्रमिकों और नागरिकों के मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना तथा गोवा सरकार को भी क्लब प्रबंधन के साथ समान रूप से जवाबदेह ठहराया. इस घटना के बाद गोवा में व्यवसायिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और पंचायतों द्वारा जारी लाइसेंसों की व्यापक जांच शुरू की गई.