डोनाल्ड ट्रंप के दावों को नकार अब्दुल अल-सायद बने अमेरिका के पहले मुस्लिम सेनेटर
मिशिगन में विरोधी अभियानों और बयानबाजी को खारिज करते हुए मतदाताओं ने डेमोक्रेट अब्दुल अल-सायद को चुनकर इतिहास रचा है. इस जीत के साथ वह अमेरिकी इतिहास के पहले मुस्लिम सेनेटर बनने जा रहे हैं.
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका के मिशिगन राज्य में हुए चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार अब्दुल अल-सायद ने अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी माइक रोजर्स को हराकर संयुक्त राज्य अमेरिका की सेनेट सीट पर जीत दर्ज की है. इस ऐतिहासिक जीत के साथ अल-सायद अमेरिकी इतिहास के पहले मुस्लिम सेनेटर बनने जा रहे हैं. वह 3 जनवरी को अपने पद की शपथ लेंगे.
चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य रिपब्लिकन नेताओं द्वारा अल-सायद के खिलाफ कई आरोप लगाए गए और उनके मुस्लिम समुदाय से होने को लेकर निशाना साधा गया. अरब अमेरिकन इंस्टीट्यूट (AAI) की कार्यकारी निदेशक माया बेरी ने कहा कि मतदाताओं द्वारा इस तरह की राजनीति को खारिज करना एक समावेशी लोकतंत्र के समर्थन को दर्शाता है.
अगस्त में हुए कठिन प्राइमरी चुनाव के दौरान अमेरिकन इजरायल पब्लिक अफेयर्स कमेटी (AIPAC) ने अल-सायद के खिलाफ बड़े पैमाने पर धन खर्च किया था. गाजा में इजरायल की नीतियों के आलोचक रहे अल-सायद पर ट्रंप और उनके सहयोगियों द्वारा कई तरह के बेबुनियाद आरोप लगाए गए.
इसके अलावा चुनाव के अंतिम दिनों में उनकी पूर्व प्राइमरी प्रतिद्वंद्वी डेमोक्रेटिक कांग्रेसवुमन हैली स्टीवंस ने भी रोजर्स का समर्थन किया था. इसके बावजूद अल-सायद ने जीत हासिल की.
पूर्व जन स्वास्थ्य अधिकारी अब्दुल अल-सायद ने सभी नागरिकों के लिए सरकारी स्वास्थ्य सेवा के विस्तार, राजनीति में धन के प्रभाव को कम करने, और कमर तोड़ महंगाई तथा जीवन-यापन के संकट से राहत दिलाने के वादों पर चुनाव लड़ा. उन्होंने विदेशी युद्धों में खर्च होने वाले धन को स्थानीय समस्याओं को हल करने में लगाने की वकालत की.
इस चुनाव में अल-सायद को डेट्रॉइट के अफ़्रीकी अमेरिकी (ब्लैक) मतदाताओं और अन्य समुदायों का मजबूत समर्थन मिला. चुनाव के दिन डेट्रॉइट के निवासियों और शिक्षकों ने अप्रवासियों की सुरक्षा, महंगाई से राहत और सड़कों पर आईसीई (ICE) की सख्त कार्रवाइयों को रोकने जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी.
वहीं, डियरबॉर्न में अरब और मुस्लिम समुदाय के मतदाताओं ने भारी संख्या में मतदान केंद्र पहुंचकर अपनी भागीदारी दर्ज कराई.
यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन-डियरबॉर्न की प्रोफेसर एमेरिटस सैली हॉवेल ने इस परिणाम पर कहा कि अल-सायद की जीत से यह स्पष्ट होता है कि जनता राजनीति में नफरत को खारिज कर बदलाव चाहती है और यह जीत समाज में सभी वर्गों के योगदान तथा उनकी आवाज की पहचान को मजबूत करती है.
अल-सायद की इस जीत ने डेमोक्रेट्स को सेनेट में अपना नियंत्रण फिर से हासिल करने में भी मदद की है.