अमेरिकी मध्यअवधि चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत पर क्या कहते हैं विश्व के नेतागण
अमेरिकी मध्यअवधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने संसद के दोनों सदनों पर कब्जा जमाकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रिपब्लिकन पार्टी को करारा झटका दिया है. इस राजनीतिक फेरबदल और ईरान युद्ध के प्रभाव पर विश्व भर के प्रमुख नेताओं ने अपनी सतर्क एवं महत्वपूर्ण प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं.
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका में हुए मध्यअवधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने ऐतिहासिक जीत हासिल करते हुए अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के दोनों सदनों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है. इस चुनाव परिणाम को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ जनता के कड़े जनादेश के रूप में देखा जा रहा है.
इस बड़े राजनीतिक उलटफेर का वैश्विक असर साफ नजर आ रहा है. वाशिंगटन में उभरी इस नई राजनीतिक स्थिति के बाद दुनिया भर के राष्ट्रध्यक्ष और राजनयिक यह आकलन कर रहे हैं कि इसका प्रभाव ईरान संघर्ष, रूस-यूक्रेन युद्ध और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों पर कैसा पड़ेगा. स्वयं राष्ट्रपति ट्रम्प ने माना है कि अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले का असर उनकी पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ा है, क्योंकि मतदाता पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के अल्पकालिक परिणामों के लिए तैयार नहीं थे.
यूरोपीय संघ की सतर्क उम्मीदें
यूरोपीय संसद की उपाध्यक्ष क्रिस्टेल शाल्डेमॉस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि वह अमेरिका के इन नतीजों से "यूरोप की ओर से सतर्क रूप से आशावादी" हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं कि सब कुछ अचानक बेहतर हो जाएगा, लेकिन इससे यूक्रेन को सहायता, हरित परिवर्तन और वैश्विक संबंधों को बल मिल सकता है. हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि यूरोपीय संघ को मजबूत बनने और अपने पैरों पर खड़े रहने के रास्ते पर बने रहना होगा, जिस पर कोई समझौता नहीं हो सकता.
ईरान का कड़ा संदेश और रुख
ईरान की संसद के अध्यक्ष और अमेरिका के साथ बातचीत के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबॉफ ने X पर लिखा कि अमेरिकी मतदाताओं ने युद्ध को खारिज कर दिया है और ईरान इस संदेश का समर्थन करता है. उन्होंने आगाह किया कि यदि अमेरिकी सरकार अपने नागरिकों की इच्छा के खिलाफ जाकर अंतरराष्ट्रीय ब्लैकमेलर्स का साथ देती है, तो उसे भयानक परिणामों का सामना करना पड़ेगा.
वहीं दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा कि वाशिंगटन में सत्ता या पार्टी बदलने से ईरान के प्रति अमेरिका की शत्रुतापूर्ण मानसिकता नहीं बदलेगी. उन्होंने कहा कि जो लोग यह सोचते हैं कि पार्टी बदलने या छूट देने से अमेरिका का रवैया बदल जाएगा, वे सख्त गलतफहमी में हैं.
इजरायल में घमासान
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ओर से तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, जिनकी अपनी गठबंधन सरकार ने भी पिछले सप्ताह संसद में बहुमत खो दिया था. हालांकि, इजराइली विपक्ष के नेता यायर गोलान ने टिप्पणी की कि इस चुनाव परिणाम ने यह साफ कर दिया है कि नेतन्याहू अमेरिकी डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन दोनों के बीच कितने विषाक्त हो चुके हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मौजूदा सुदूर-दक्षिणपंथी सरकार सत्ता में बनी रहती है तो इजरायल वैश्विक अलगाव, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और अमेरिका से टकराव के मुहाने पर खड़ा हो जाएगा. विपक्ष के एक अन्य नेता यायर लापिड ने भी कहा कि अमेरिकी नतीजों ने नेतन्याहू के नेतृत्व में किसी भी तरह की साझा सरकार की संभावना को खत्म कर दिया है.
जर्मनी की सतर्कता
जर्मन चांसलर फ्रिड्रिक मर्ज़ ने कहा कि कांग्रेस पर नियंत्रण गंवाने के बाद ट्रम्प अब कार्यकारी आदेशों के जरिए फैसले ले सकते हैं. उन्होंने याद दिलाया कि ट्रम्प पिछले दो सालों से बिना कांग्रेस की सलाह के ही शासन चला रहे थे, इसलिए आगे भी कुछ अलग होने की उम्मीद कम है. वहीं जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने डेमोक्रेटिक पार्टी को बधाई देते हुए दोहराया कि यूरोप को अपनी सुरक्षा खुद संभालने के लिए अपनी तैयारियों को और बेहतर करना होगा.
ब्रिटेन की अटूट साझेदारी
ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री जेम्स फ्रिथ ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी राजनीति में बड़े बदलावों के बावजूद यूके और अमेरिका के संबंध अडिग रहेंगे. उन्होंने कहा कि वाशिंगटन में सत्ता का संतुलन बदलता रहता है, लेकिन ब्रिटेन और अमेरिका के बीच का रणनीतिक रिश्ता बेहद मजबूत है और इसमें किसी बदलाव की उम्मीद नहीं है.
फ्रांस का इंतजार
फ्रांस के वित्त मंत्री रोलांड लेस्क्योर ने कहा कि फ्रांस यह देखने का इंतजार करेगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय नीतियों को नियंत्रित करने वाले ट्रम्प अपने रुख में बदलाव करते हैं या नहीं. उन्होंने कहा कि यह देखने वाली बात होगी कि क्या ट्रम्प पेट्रोल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय मामलों में संयम बरतते हैं.
स्पेन का कड़ा प्रहार
स्पेन के वामपंथी प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने डेमोक्रेट्स की इस जीत को वैश्विक स्तर पर सुदूर-दक्षिणपंथी ताकतों के कमजोर होने का प्रतीक बताया. उन्होंने कहा कि ब्राजील और अमेरिका के बाद अब स्पेन में भी ऐसा ही होगा. सांचेज के अनुसार, अमेरिकी मतदाताओं ने नफरत, लैंगिक भेदभाव, जलवायु परिवर्तन को नकारने और अमीरों के विशेषाधिकारों की राजनीति को पूरी तरह खारिज कर दिया है.
यूनान (ग्रीस) का रुख
ग्रीस के सरकारी प्रवक्ता पावलोस मारिनाकिस ने कहा कि चुनाव नतीजों से ग्रीस और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. उन्होंने अमेरिका को एक रणनीतिक सहयोगी बताते हुए कहा कि सभी प्रमुख प्रोजेक्ट और समझौते पहले की तरह ही जारी रहेंगे.
रूस की संतुलित प्रतिक्रिया
रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने कहा कि रूसी विदेश नीति किसी अन्य देश के राजनीतिक उतार-चढ़ाव पर आधारित नहीं होती है और रूस राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निर्देशों के अनुसार काम करना जारी रखेगा. वहीं क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने उम्मीद जताई कि इन नतीजों से ट्रम्प के शांति प्रयासों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
चीन की रणनीतिक स्थिरता
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि बीजिंग अमेरिका के साथ रचनात्मक और रणनीतिक संबंध बनाए रखेगा. उन्होंने अमेरिकी चुनाव को उनका आंतरिक मामला बताते हुए कहा कि चीन दोनों देशों के बीच हुए समझौतों को लागू करने और आपसी सम्मान के आधार पर सहयोग बढ़ाने का इच्छुक है.
जापान की अटूट प्रतिबद्धता
जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा ने कहा कि परिणाम चाहे जो भी हों, जापान और अमेरिका का गठबंधन देश की सुरक्षा और विदेश नीति का मुख्य आधार बना रहेगा. अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के दौर में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए यह गठबंधन आवश्यक है.
दक्षिण अफ्रीका की नई शुरुआत
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने कहा कि इन चुनाव नतीजों ने वैश्विक संबंधों में एक नए युग की शुरुआत कर दी है. अमेरिकी जनता ने संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स को चुनकर अपना स्पष्ट फैसला सुना दिया है.