'अडानी हों या भागवत, जज अपनी पसंद का चुनें', राहुल गांधी की पीएम मोदी को सीधी बहस की चुनौती
संसद में माइक बंद करने और अमेरिकी डील पर दबाव में दस्तखत करने का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी ने पीएम मोदी को आमने-सामने बहस का न्योता दिया है. जानिए पंजाब की रैली से कांग्रेस नेता के इस नए हमले की पूरी बात.
नई दिल्ली । डेस्क: पंजाब के संगरूर में 'इंसाफ रैली' को संबोधित करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमने-सामने की बहस के लिए एक बार फिर से सीधी चुनौती दी है. राहुल गांधी ने दावा किया कि अगर यह बहस होती है तो वे पांच मिनट के भीतर यह साबित कर सकते हैं कि प्रधानमंत्री देशद्रोही हैं और उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नियंत्रित करते हैं.
राहुल गांधी ने जनसभा से पूछा कि आज उनका मूड कैसा है, और इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री पर तीखे हमले शुरू किए. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी इस बहस के लिए अपनी पसंद का कोई भी जज चुन सकते हैं—चाहे वे मोहन भागवत को बैठा लें या अडानी को, या फिर एनडीटीवी के स्टूडियो में बहस रख लें. उन्होंने गारंटी जताते हुए कहा कि पीएम मोदी उनके सामने बैठने की हिम्मत नहीं करेंगे.
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दबाव और धमकियों के चलते प्रधानमंत्री मोदी ने बिना कैबिनेट या नौकरशाहों को जानकारी दिए पांच मिनट में अमेरिकी ट्रेड डील पर हस्ताक्षर कर दिए.
उन्होंने कहा कि इस समझौते के जरिए भारत के किसानों, छोटे और मध्यम उद्योगों तथा देश के डाटा को सौंप दिया गया. इसके बदले में ट्रंप ने अमेरिका में अडानी के खिलाफ चल रहे केस को बंद करवा दिया.
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि ट्रंप लगातार यह दावा करते हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाया था, लेकिन पीएम मोदी इसके खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोल पाते.
भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वे संसद में चर्चा की बात तो करते हैं, लेकिन वहां बोलते समय उनका माइक बंद कर दिया जाता है और उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी जाती.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर विशेष सत्र बुलाने और विपक्ष को बहस की चुनौती देने के संदर्भ में राहुल ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी केवल उद्योगपतियों के लिए काम करते हैं, जबकि कांग्रेस किसानों और छोटे-मध्यम व्यापारियों के हित में काम करेगी.