कोरबा गैंगरेप एवं हत्या: फांसी नहीं उम्रकैद की सजा
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोरबा गैंगरेप और हत्या मामले में पांच दोषियों की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोरबा जिले में हुए एक जघन्य गैंगरेप और हत्या के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने पांच दोषियों संतराम मांझवार (49), अब्दुल जब्बार (34), अनिल कुमार सरथी (24), परदेशी राम (39), और आनंद राम पनिका (29) को दी गई मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है.
छठे दोषी, उमाशंकर यादव (26), को पहले ही निचली अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. यह मामला 2021 का है, जब एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसकी हत्या के साथ-साथ उसके पिता और चार वर्षीय भतीजी की भी हत्या कर दी गई थी.
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए सजा जरूरी है, लेकिन मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील करना उचित होगा. कोर्ट ने सबूतों और परिस्थितियों की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया.
इस मामले में विशेष लोक अभियोजक सुनील कुमार मिश्रा ने बताया कि मुख्य आरोपी संतराम मांझवार ने पीड़िता के परिवार को अपने यहां पशु चराने का काम दिया था और लड़की को दूसरी पत्नी बनाने का दबाव डाल रहा था. परिवार के विरोध करने पर यह जघन्य अपराध हुआ.
यह मामला कोरबा जिले के गधुपरोदा गांव के पास लेमरू पुलिस स्टेशन क्षेत्र का है, जहां 29 जनवरी 2021 को यह घटना हुई थी.
घटना के कुछ दिन बाद पीड़ित के भाई द्वारा गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करने पर पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था.