छत्तीसगढ़ में 'महुआ' से बनेगी हेरिटेज शराब
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने राज्य के आदिवासी समाज को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्थानीय वनोपज को बढ़ावा देने के लिए एक बेहद अनोखा और बड़ा कदम उठाया है. राज्य सरकार ने महुआ पर आधारित 'हेरिटेज लिकर' (पारंपरिक शराब) के निर्माण के लिए एक औद्योगिक मॉडल विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना को हरी झंडी दे दी है. इस पहल का मुख्य उद्देश्य बस्तर और अन्य जनजातीय क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और प्रचुर मात्रा में उपलब्ध वन संसाधनों का सही दोहन करना है.
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में इस योजना को औपचारिक मंजूरी दी गई. मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि महुआ आधारित हेरिटेज शराब निर्माण की गतिविधियों को राज्य की औद्योगिक नीति के तहत 'कृषि-प्रसंस्करण (एग्रो-प्रोसेसिंग) औद्योगिक इकाइयों' के समकक्ष दर्जा दिया जाए.
जानकारों का मानना है कि यदि आदिवासी सहकारी समितियों द्वारा महुआ शराब तैयार की जाती है और सरकार उसे मार्केटिंग, आधुनिक तकनीक व ब्रांडिंग का सहयोग देती है, तो इससे आदिवासी अर्थव्यवस्था की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है.
इससे होने वाले मुनाफे का सीधा फायदा उन आदिवासी महिलाओं को मिलेगा जो जंगलों से महुआ इकट्ठा करती हैं. इसे गुजरात के 'अमूल' सहकारी मॉडल की तर्ज पर विकसित करने की कल्पना की जा रही है, जिससे स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे.
इस नई नीति को धरातल पर उतारने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार अन्य राज्यों के मौजूदा मॉडलों का अध्ययन भी कर रही है. सरकार वाणिज्य विभाग के माध्यम से निजी उद्यमियों से 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट'
आमंत्रित करेगी. हालांकि, इसमें स्पष्ट किया गया है कि मानक औद्योगिक नीति के अलावा कोई अतिरिक्त सब्सिडी नहीं दी जाएगी और उद्यमियों को कच्चे माल की खरीद दर पहले से घोषित करनी होगी.
इस पूरे प्रोजेक्ट में उत्पादन का जिम्मा जहां निजी संस्थाओं का होगा, वहीं राज्य सरकार उन्हें आधिकारिक मार्केटिंग चैनल, लाइसेंसिंग में सहायता और बैंकों से लोन दिलाने में मदद करेगी. 'छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ' को इस पूरी योजना के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है.
लघु वनोपज संघ को राज्य में महुआ की उपलब्धता, न्यूनतम कच्चे माल की आवश्यकता, सप्लाई चेन और बाजार की संभावनाओं का आकलन करने के लिए एक व्यापक व्यवहार्यता अध्ययन (Feasibility Study) करने का काम सौंपा गया है.
सरकार इस परियोजना को गति देने के लिए जल्द ही एक इन्वेस्टर्स समिट (निवेशक सम्मेलन) आयोजित करने की योजना भी बना रही है, ताकि महुआ को छत्तीसगढ़ के एक फ्लैगशिप हेरिटेज बेवरेज (गौरवशाली पारंपरिक पेय) के रूप में देश-दुनिया में स्थापित किया जा सके.