बीमार मां को कंधे पर बैठा 20 किमी चला, अस्पताल पहुंचने से पहले मौत
बीमार मां को कंधे पर बैठा 20 किमी चला
दंतेवाड़ा/कोरबा | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के कई गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. गांव तक सड़क नहीं होने से आदिवासी ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं तक के लिए तरस रहे हैं.
गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंचती तो मजबूरी में मरीज को खाट या कंधे पर लादकर इलाज के लिए ले जाना पड़ रहा है.
कुआकोंडा तहसील के ग्राम पंचायत नहाड़ी निवासी एक बीमार महिला को अस्पताल ले जाने के लिए उसके बेटे को मां को कंधे पर बिठाकर 20 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा. तब जाकर एंबुलेंस मिली, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही बिना इलाज के महिला ने दम तोड़ दिया. महिला की मौत ने बस्तर में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को उजागर किया है.
सुकमा जिले के कुमारगुड़ा पंचायत की रहने वाली वृद्ध महिला बंडी मुडियामी अपनी बेटी के घर नहाड़ी आई थी. यहां उसकी तबीयत बिगड़ गई.
बेटी के परिजन उसे घर लेकर आए. यहां से बेटे ने अपनी मां को अस्पताल ले जाने डोला में बैठा कर 20 किमी का पैदल सफर तय किया. रास्ता बहुत ही खराब था. जिसमें पैदल चलना भी काफी मुश्किल था. घंटों पैदल चलने के बाद एंबुलेंस मिली.
एंबुलेंस से उसे जिला अस्पताल लाया जा रहा था, लेकिन उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया. इसके बाद परिजन शव को लेकर रास्ते से ही वापस अपने गांव लौट गए.
6 दिनों से थी बीमार
बताया गया कि बंडी मुडियामी पिछले छह दिनों से बीमार थी. उसे तेज बुखार आ रहा था. रास्ता खराब और भारी बारिश के चलते समय पर परिजन अस्पताल नहीं पहुंचा सके. अचानक तेज बुखार के चलते, उसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई.
बस्तर में जगह-जगह सुरक्षा बलों का कैंप तो स्थापित हो गया है, लेकिन आज भी दर्जनों गांव पहुंच विहीन है. ये गांव आज भी विकास की बाट जोह रहे हैं.
हालांकि सरकार दावा करती है कि नियद नेल्लानार पंचायत के तहत अंदरूनी इलाकों का विकास किया जा रहा है. लेकिन इन गांवों से हमेशा ऐसी तस्वीर निकलकर सामने आती रही हैं, जो सरकार के तमाम दावों को खोखला साबित करती रही हैं. नहाड़ी गांव में भी नियद नेल्लानार के तहत विकास योजनाओं का क्रियान्वयन हो रहा है.
कोरबा में बीमार को खाट पर लिटा अस्पताल पहुंचे
इसी तरह छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के पाली विकासखंड के जलहल गांव में बारिश के दौरान मरीज को खाट पर लिटाकर परिजनों को सात किलोमीटर पैदल चलना पड़ा.
जलहल निवासी करसीला एक्का मौसमी बीमारी से पीड़ित थी. शरीर बुखार से तप रहा था.
पति रामधन एक्का ने एम्बुलेंस के लिए फोन किया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. कोई और दूसरा साधन भी नहीं मिला.
उस समय तेज बारिश हो रही थी. परिजन मरीज को खाट पर लिटाकर लीमगांव तक ले आए. बारिश से बचाने के लिए खाट को तिरपाल से ढंकना पड़ा.
इस दौरान लीमगांव मुख्य मार्ग तक लगभग सात किलोमीटर ग्रामीण पैदल चले. लीमगांव मुख्य मार्ग से निजी वाहन की मदद से पाली मुख्यालय के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया.
अब महिला की स्थिति सामान्य बताई जा रही है. ग्रामीणों का कहना है कि एंबुलेंस का इंतजार करते, तो शायद देर हो जाती.