HC: वक्फ ट्रिब्युनल को दो महीने में विवाद सुलझाने का निर्देश
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कवर्धा में एक वक्फ संपत्ति पर कथित अनधिकृत निर्माण से जुड़े एक लंबित विवाद को लेकर बड़ा निर्देश दिया है. हाई कोर्ट ने राज्य वक्फ न्यायाधिकरण (Waqf Tribunal) को इस मामले पर बिना किसी देरी के दो महीने के भीतर फैसला करने को कहा है. अदालत ने इस मामले के गुण-दोष पर खुद कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.
यह आदेश न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने कबीरधाम जिले के कवर्धा निवासी मोहम्मद अजमल खान द्वारा दायर एक रिट याचिका का निपटारा करते हुए दिया. याचिकाकर्ता ने जामा मस्जिद मुस्लिम ट्रस्ट के मुतवल्ली हनीफ खान द्वारा मस्जिद परिसर के पास 350 वर्ग मीटर के एक व्यावसायिक भूखंड पर किए जा रहे निर्माण कार्य को चुनौती दी थी.
याचिकाकर्ता का कहना था कि छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) ने इस साल 18 मार्च को ही कबीरधाम के जिला कलेक्टर को एक सिफारिश पत्र भेजा था, जिसमें निर्माण कार्य को तुरंत रोकने के निर्देश दिए गए थे. इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन इस अवैध निर्माण को रोकने में नाकाम रहा.
थक-हारकर याचिकाकर्ता ने जनवरी 2026 में रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ वक्फ न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन उस समय कोरम पूरा न होने के कारण मामले की सुनवाई नहीं हो सकी थी.
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने अदालत को सूचित किया कि अब वक्फ न्यायाधिकरण पूरी तरह से सक्रिय है और इसके सभी तीन सदस्य नियुक्त हो चुके हैं.
सरकार की ओर से दलील दी गई कि जब इस मामले के लिए पहले से ही एक वैधानिक वैकल्पिक मंच मौजूद है और मामला वहां लंबित है, तो याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट के असाधारण क्षेत्राधिकार का उपयोग करने के बजाय न्यायाधिकरण में ही अपनी बात रखनी चाहिए.
दोनों पक्षों को सुनने के बाद, न्यायमूर्ति प्रसाद ने न्यायाधिकरण को निर्देश दिया कि वह आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के दो महीने के भीतर कानून के दायरे में रहते हुए इस कार्यवाही पर अंतिम निर्णय ले. कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि उसने इस विवाद में दोनों पक्षों के दावों की वैधता पर अपनी कोई राय व्यक्त नहीं की है.