GST में बड़े बदलाव की तैयारी: 5% और 18% दरें प्रस्तावित
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्र सरकार ने मौजूदा अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को बदलने के लिए एक नई दो-स्तरीय जीएसटी दर संरचना प्रस्तावित की है. इस प्रस्ताव में 5% और 18% की दरें शामिल हैं, जिनका उद्देश्य आम लोगों पर कर का बोझ कम करना, उपभोग को बढ़ावा देना और अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है. यह कदम विशेष रूप से वैश्विक व्यापार में संभावित चुनौतियों, जैसे कि ट्रंप प्रशासन के टैरिफ, के मद्देनजर उठाया जा रहा है.
केंद्र ने जीएसटी दरों के तर्कसंगत बनाने के लिए राज्य वित्त मंत्रियों के पैनल को यह प्रस्ताव भेजा है. पैनल इस पर चर्चा करेगा और इसे अगले महीने होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक में पेश करेगा. वर्तमान में जीएसटी की दरें 0%, 5%, 12%, 18% और 28% हैं, लेकिन नए प्रस्ताव में 12% और 28% की दरों को हटाकर केवल दो मुख्य दरें (5% और 18%) और विलासिता व हानिकारक वस्तुओं के लिए 40% की विशेष दर रखी जाएगी.
*5% दर: दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर लागू होगी. मौजूदा 12% स्लैब की 99% वस्तुएं अब इस श्रेणी में आएंगी.
*18% दर: इलेक्ट्रॉनिक्स और सेवाओं पर लागू होगी. वर्तमान 28% स्लैब की लगभग 90% वस्तुएं और सेवाएं इस दर में स्थानांतरित होंगी.
*40% विशेष दर: केवल सात वस्तुओं, जैसे तंबाकू और ऑनलाइन गेमिंग, पर लागू होगी. तंबाकू पर कुल कर की दर 88% पर बनी रहेगी.
इस सुधार से आठ प्रमुख क्षेत्रों - कपड़ा, उर्वरक, नवीकरणीय ऊर्जा, ऑटोमोटिव, हस्तशिल्प, कृषि, स्वास्थ्य और बीमा को सबसे अधिक लाभ होने की उम्मीद है. यह नई संरचना उपभोग को बढ़ावा देगी और अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करेगी. सरकार का कहना है कि शुरुआती कुछ महीनों में राजस्व में कमी आ सकती है, लेकिन अगले कुछ महीनों में यह कमी पूरी हो जाएगी. नई दर संरचना को तीसरी तिमाही की शुरुआत तक लागू करने की योजना है.
राज्यों की प्रतिक्रिया
विपक्ष शासित राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पंजाब के लिए यह प्रस्ताव महत्वपूर्ण है, क्योंकि जीएसटी राजस्व उनके कर संग्रह का प्रमुख हिस्सा है. इन राज्यों की प्रतिक्रिया इस सुधार की सफलता में महत्वपूर्ण होगी. केंद्र सरकार अगले कुछ हफ्तों में व्यापक सहमति बनाने की दिशा में काम करेगी.
वर्तमान जीएसटी व्यवस्था 1 जुलाई, 2017 से लागू है, जिसमें केंद्र और राज्य के करों को समाहित किया गया था. इसमें 18% की दर से 65% राजस्व, 28% की दर से 15% और 12% की दर से केवल 5% राजस्व प्राप्त होता है. श्रम-प्रधान और निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों जैसे हीरे और कीमती पत्थरों पर मौजूदा दरें बरकरार रहेंगी.
*वर्गीकरण संबंधी विवादों में कमी: दरों की संख्या कम होने से कर वर्गीकरण आसान होगा.
*उलटे शुल्क ढांचे का सुधार: विशिष्ट क्षेत्रों में कर संरचना को ठीक किया जाएगा.
*स्थिरता और पारदर्शिता: दीर्घकालिक दर स्थिरता से उद्योगों को बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी.
*व्यवसाय में आसानी: छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स के लिए तकनीक आधारित जीएसटी पंजीकरण और प्री-फिल्ड रिटर्न की सुविधा.
इसके अलावा, निर्यातकों और उलटे शुल्क ढांचे वाले व्यवसायों के लिए रिफंड की प्रक्रिया को तेज और स्वचालित किया जाएगा.
फिक्की के अध्यक्ष हर्षा वी. अग्रवाल ने कहा, "आठ साल बाद जीएसटी की व्यापक समीक्षा एक स्वागतयोग्य कदम है. यह कर का बोझ कम करेगा और व्यवसाय करने की सुगमता को बढ़ाएगा."