गरियाबंद: अधूरे पुल और 20 फीट ऊंची सीढ़ी के सहारे स्कूल जाने को मजबूर बच्चे
गरियाबंद । संवाददाता: गरियाबंद के मैनपुर ब्लॉक में देहरगुड़ा और खंभाथा गांव के बीच पैरी नदी पर बन रहा पुल पिछले पांच सालों से अधूरा पड़ा है. बारिश के मौसम में उफान मारती नदी को पार करने के लिए बच्चों के पास कोई सुरक्षित साधन नहीं है. शिक्षा पाने की ललक में मासूम बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर रोजाना 20 फीट ऊंचे खंभे पर लगी लोहे की छड़ों की संकरी सीढ़ी चढ़ते हैं और फिर दो फीट चौड़ी प्लाई पर संतुलन बनाते हुए गहरे गड्ढों को पार करते हैं.
भारी बस्ते टांगे इन स्कूली बच्चों के कदम का एक भी गलत संतुलन उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है.
वर्ष 2022 में मंजूर हुआ यह पुल ₹5 करोड़ की लागत से तैयार होना था, लेकिन ठेकेदार और निर्माण एजेंसी की लापरवाही के कारण सालों बाद भी इसका काम अटका हुआ है. अधूरे पुल के पिलरों के बीच झाड़ियां उग आई हैं और बाहर निकली लोहे की नुकीली छड़ें हर पल हादसों को न्योता दे रही हैं.
स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद शासन-प्रशासन इस गंभीर समस्या पर मौन साधे बैठा है.
मामले पर राजनीतिक गरमाहट भी बढ़ गई है. क्षेत्रीय विधायक जनक लाल ध्रुव ने राज्य सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि जनहित के निर्माण कार्य ठप पड़े हैं और अगर जल्द ही पुल का निर्माण पूरा नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन किया जाएगा.
वहीं, सेतु निर्माण विभाग के इंजीनियर फगुलाल कुर्रे का दावा है कि पुल का स्लैब वर्क पूरा हो चुका है और एप्रोच रोड का काम बाकी है, जिसे अगले दो से तीन महीनों में पूरा कर लिया जाएगा.
दूसरी ओर, गरियाबंद के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) राजेश चंद्राकर ने सुरक्षा के लिहाज से बच्चों को इस तरह पुल न पार करने के निर्देश जारी किए हैं. उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर एसडीएम को सूचित करने की बात कहते हुए अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों की मदद करने या पानी का स्तर कम होने तक बच्चों को रिश्तेदार के घर ठहराने की सलाह दी है.
हालांकि, जब तक इसका स्थाई समाधान नहीं निकल जाता, तब तक देहरगुड़ा के बच्चों की पढ़ाई और जिंदगी, दोनों ही इस अधूरे पुल के सहारे दांव पर लगी हुई हैं.