रवि, 18 अक्टू. 2026

CGKhabar

आदिवासी विकास विभाग में फर्जीवाड़ा, 45 टेंडर निकले फर्जी

H

Hupendra Sharma

24 अग. 2025, 10:03 AM 2 मिनट में पढ़ें 2

फर्जीवाड़ा
फर्जीवाड़ा

दंतेवाड़ा | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में आदिवासी विकास विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. जांच में खुलासा हुआ है कि विभाग में पदस्थ रहे दो पूर्व सहायक आयुक्तों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए पांच सालों में अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए 45 फर्जी टेंडर जारी किए हैं.


इस मामले में वर्तमान आदिवासी आयुक्त ने कोतवाली थाना में लिखित आवेदन दिया है. इस आवेदन के आधार पर थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है.

विज्ञापन


दरअसल कलेक्टर कुणाल दुदावत को आदिम जाति कल्याण विभाग में फर्जीवाड़ा होने की लगातार शिकायत मिल रही थी.


इसके बाद कलेक्टर ने मामले की जांच करवाई. जिसमें जांच कमेटी ने निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी पाई.


साल 2021 से लेकर 2025 तक डीएमएफ मद के तहत हुए इस विभाग के सभी टेंडरों की जांच करवाई गई. इस जांच में खुलासा हुआ है कि 5 सालों में 45 फर्जी टेंडर निकलवाए गए.


इसके बाद अपने चहेते ठेकेदारों को काम बांट दिया गया. अभी भी फाइलों को खंगाला जा रहा है.इस दौरान सहायक आयुक्त के पद पर डॉ आनंदजी सिंह और केएस मसराम रहे हैं.


आरोप है कि विभाग के क्लर्क संजय कोडोपी द्वारा कूट रचित दस्तावेज तैयार कर निविदा प्रक्रिया को अंजाम दिया गया है. फिलहाल संजय कोडोपी को निलंबित कर दिया गया है.


इन सभी के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी हो चुकी है. इसके बाद से पुलिस मामले की जांच कर रही है.


बताया जा रहा है कि कूटरचना हुई है तो क्लर्क, रिटायर आदिवासी आयुक्त और तबादले पर गए आदिवासी आयुक्त आनंदजी सिंह की मुश्किल बढ़ना तय है.


निर्माण में गड़बड़ियां और बलात्कार का आरोपूर्व सहायक आयुक्त डॉ. आनंदजी सिंह का नाम पहले भी विवादों में रह चुका है. उनके खिलाफ गीदम थाने में बलात्कार का मामला दर्ज हुआ था.


हालांकि फिलहाल इस मामले में उन्हें अदालत से राहत मिली हुई है. इस पूरे मामले के पीछे विभाग का निर्माण कार्य ही है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.


पुलिस सूत्रों का कहना है कि जिस लड़की ने अनाचार का आरोप लगाया था, उसके पिता ठेकेदार हैं. उन्होंने विभाग में खूब ठेकेदारी की है.


इतना ही नहीं आयुक्त ने अपनी महिला मित्र के परिवारजनों के खाते में पैसा भी डाला है. इस मामले में गीदम पुलिस जांच कर रही है.


फिलहाल आनंदजी सिंह रायपुर में पदस्थ हैं, जबकि केएस मसराम रिटायर्ड हो चुके हैं. इस पूरे मामले में डीएमएफ के लिए गठित टेंडर समिति भी जांच के दायरे में है. प

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP