तेंदूपत्ता खरीदीः लक्ष्य से पिछड़ा वन विभाग
तेंदूपत्ता खरीदी में लक्ष्य से पिछड़ा वन विभाग
बस्तर | संवाददाताः बस्तर में इस साल तेंदूपत्ता की सरकारी खरीदी होने के बाद भी विभाग लक्ष्य से काफी पीछे रह गया है. जबकि सरकार ने कीमत बढ़ाकर 5500 रुपए कर दी थी.
इससे बस्तर के तेंदूपत्ता संग्राहक को बड़ा लाभ होने की उम्मीद थी, लेकिन पिछले साल की तुलना में इस साल तेंदूपत्ता की खरीदी काफी प्रभावित हुई है.
इसकी वजह विभाग बस्तर में बेमौसम बारिश होना बता रहा है. वहीं आदिवासी समाज माओवादियों के खिलाफ पुलिस द्वारा चलाए गए एंटी नक्सल ऑपरेशन को बता रहे हैं.
दरअसल, बस्तर की लौह अयस्क के साथ यहां के जंगलों से निकलने वाले तेंदूपत्ता जिसे हरा सोना भी कहा जाता है, इसकी मांग पूरे देश भर में है.
सबसे अच्छी क्वालिटी का तेंदूपत्ता बस्तर के घने जंगलों में ही पाया जाता है. यहां के आदिवासी परिवार सिर्फ एक महीने में ही तेंदूपत्ता संग्रहण कर अगले कुछ महीनों का खर्च निकाल लेते हैं.
इस साल सरकार ने तेंदूपत्ता ठेकेदारों के जरिए माओवादियों के हाथ तक पहुंचने वाली लेवी को रोकने के लिए सरकारी खरीदी का ऐलान किया.
जिसके चलते वनोपज समितियों ने गांव-गांव में खरीदी की, लेकिन इससे संग्राहकों को बड़ा झटका लगा है.
बीते साल की तुलना में बस्तर वन वृत्त के अधिकांश नक्सल प्रभावित जिलों में केवल एक तिहाई ही संग्रहण हो पाया है.
साल 2024 में जहां तेंदूपत्ता संग्राहकों को विभाग द्वारा 1 अरब 55 करोड़ 49 लाख 38 हजार 610 रुपये का भुगतान किया गया था, वहीं इस बार केवल 64 करोड़ 62 लाख 40 हजार 930 रुपए का भुगतान किया गया है.
संग्राहकों की संख्या में अंतर
आंकड़ों को देखकर समझा जा सकता है कि न केवल संग्रहण की रकम बल्कि बाद में बोनस की रकम भी संग्राहकों को नहीं मिलेगी.
करोड़ों रुपए के नुकसान के साथ ही इस सीजन में तेंदूपत्ता संग्राहकों की संख्या में भी बड़ा अंतर दिखाई देता है.
साल 2024 में जहां 1 लाख 70 हजार 400 परिवारों ने तेंदूपत्ता संग्रहण किया था. वहीं इस बार 1 लाख 1092 परिवारों ने तेंदूपत्ता संग्रहण किया, यानि कि करीब 70 हजार परिवार इस बार तेंदूपत्ता संग्रहण की प्रक्रिया से ही दूर रहे.
इस मामले में सीसीएफ आर.सी दुग्गा का कहना है कि बारिश की वजह से तेंदूपता संग्रहण प्रभावित हुआ. मौसम से पहले हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि होने की वजह से तेंदूपत्ता संग्रहण नहीं हो पाया. इसी वजह से विभाग खरीदी के लक्ष्य से पिछड़ गया. वहीं इस साल तेंदूपत्ता भी बारिश की वजह से खराब हुआ.
नक्सल ऑपरेशन बनी समस्या
दूसरी ओर सर्व आदिवासी समाज के संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर का कहना है कि इस साल फरवरी महीने से ही बस्तर के अंदरूनी इलाकों बस्तर, सुकमा, कोंडागांव और दंतेवाड़ा में लगातार माओवादियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाया गया. इस ऑपरेशन से कहीं ना कहीं तेंदूपत्ता संग्रहण भी प्रभावित हुआ.
उन्होंने कहा कि इन ऑपरेशन से ग्रामीण पूरी तरह से दहशत में थे. इस वजह से ग्रामीण तेंदूपत्ता की तोड़ाई नहीं कर पाए. खासकर बीजापुर और सुकमा सीमा पर कर्रेगुटा की पहाड़ियों में कई दिनों तक ऑपरेशन चलाया गया. जिससे इस क्षेत्र के ग्रामीण तेंदूपत्ता तोड़ने जंगल की तरफ नहीं गए. इसके अलावा और भी कई बड़े ऑपरेशन पुलिस द्वारा चलाए गये, जिससे तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य प्रभावित हुआ.