इलेक्ट्रॉनिक इम्प्लांट से आँखों की रोशनी लौटी, पढ़ने में हुए सक्षम
नई दिल्ली । डेस्क: सोमवार को मेडिकल शोधकर्ताओं ने एक बड़ी सफलता की घोषणा की है. एक छोटे इलेक्ट्रॉनिक इम्प्लांट (Implant) और विशेष चश्मे (Special Glasses) की मदद से उन्नत ड्राई एज-रिलेटेड मैकुलर डीजेनरेशन (AMD) के मरीज़ों की कार्यशील दृष्टि (Functional Vision) को बहाल करने में सफलता मिली है. AMD अंधापन का एक लाइलाज कारण है.
न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित क्लिनिकल परीक्षण (Clinical Trial) के परिणामों के अनुसार, पाँच देशों में परीक्षण में शामिल 32 AMD मरीज़ों में से 27 (84 प्रतिशत) इम्प्लांट का उपयोग करके अक्षर, संख्याएँ और शब्द पढ़ पाए. मरीज़ औसतन विज़न चार्ट पर पाँच लाइनें पढ़ने में सक्षम थे, जबकि कुछ मरीज़ इम्प्लांट से पहले चार्ट भी नहीं देख पाते थे.
स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डैनियल पालनकर (Daniel Palanker), जिन्होंने शोध का सह-नेतृत्व किया, ने बताया कि यह पहली बार है जब किसी प्रोस्थेटिक डिवाइस ने केवल 'प्रकाश की अनुभूति' (Light Perception) के बजाय 'फॉर्म विज़न' (Form Vision) यानी आकार और पैटर्न को समझने की क्षमता प्रदान की है. यह इम्प्लांट क्षतिग्रस्त प्रकाश-संवेदनशील कोशिकाओं (Light-Sensitive Cells) को बाइपास करता है और प्रकाश को विद्युत संकेतों में बदलकर मस्तिष्क तक पहुंचाता है.
यह इम्प्लांट PRIMA सिस्टम का हिस्सा है, जिसे विकसित करने वाली अमेरिकी कंपनी साइंस कॉर्पोरेशन (Science Corporation) ने यूरोप और अमेरिका में क्लिनिकल उपयोग प्राधिकरण के लिए आवेदन किया है.
इम्प्लांट कैसे काम करता है (How the Implant Works)-
यह इम्प्लांट उन्नत ड्राई एज-रिलेटेड मैकुलर डीजेनरेशन (AMD) के मरीज़ों में दृष्टि बहाल करने के लिए एक अत्याधुनिक तरीका अपनाता है:
क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को बाइपास करना-
उन्नत AMD (Geographic Atrophy) में, आँख के रेटिना के केंद्र (मैक्युला) में मौजूद प्रकाश-संवेदनशील कोशिकाएं (Photoreceptors) नष्ट हो जाती हैं, जिससे केंद्रीय दृष्टि में एक धुंधला या खाली स्थान बन जाता है.
यह 2mm x 2mm का सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक इम्प्लांट, जो लगभग मानव बाल की मोटाई का आधा है, सीधे रेटिना के केंद्र के नीचे प्रत्यारोपित (Implanted) किया जाता है, जहाँ मृत कोशिकाएं होती हैं.
प्रकाश को विद्युत संकेत में बदलना-
यह इम्प्लांट मृत प्रकाश-संवेदनशील कोशिकाओं की जगह लेता है.
यह एक विशेष चश्मे (Special Glasses) के साथ जोड़ा जाता है, जो प्रकाश को कैप्चर करता है.
इम्प्लांट इस कैप्चर किए गए प्रकाश को विद्युत संकेतों (Electrical Signals) में परिवर्तित करता है.
मस्तिष्क तक संचार-
ये विद्युत संकेत रेटिना में बची हुई तंत्रिका कोशिकाओं (Nerve Cells) को उत्तेजित करते हैं.
इसके बाद ये संकेत मस्तिष्क (Brain) तक भेजे जाते हैं, जिसे वह 'दृष्टि' के रूप में व्याख्या करता है.
प्रशिक्षण और कार्यक्षमता-
सर्जरी के लगभग एक महीने बाद चिप को सक्रिय किया जाता है.
मरीज़ों को फिर से ध्यान केंद्रित करना, ज़ूम करना और पढ़ना सीखने के लिए प्रशिक्षण (Training) दिया जाता है.
चश्मे में डिजिटल एन्हांसमेंट (Digital Enhancements) जैसे कि ज़ूम और उच्च कंट्रास्ट (Higher Contrast) की सुविधा होती है, जिससे मरीज़ों को 20/42 दृष्टि के बराबर तीक्ष्णता (Acuity) के साथ पढ़ने में मदद मिलती है.
यह उपकरण वर्तमान में केवल काले और सफेद रंग (Black-and-White Vision) में दृष्टि प्रदान करता है, लेकिन शोधकर्ता चेहरे की पहचान के लिए जल्द ही पूरे ग्रेस्केल रेंज (Full Grayscale) को सक्षम करने के लिए सॉफ्टवेयर पर काम कर रहे हैं. (फोटो-प्रतीकात्मक)