तांदुला नदी को मूल स्वरूप में लाने की कवायद, बुलडोजर से हटा अतिक्रमण
रायपुर । संवाददाता: बालोद जिले की जीवनदायिनी तांदुला नदी को उसके वास्तविक और मूल स्वरूप में वापस लाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी गई है. जिला मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम सिवनी और देउरतराई क्षेत्र में तांदुला नदी के तट पर किए गए व्यापक अवैध कब्जे को हटाने के लिए सुबह 5.30 बजे से ही राजस्व, पुलिस और जल संसाधन विभाग की संयुक्त टीम ने मोर्चा संभाल लिया.
तहसीलदार द्वारा सभी 14 चिन्हित अतिक्रमणकारियों को 24 घंटे के भीतर स्वेच्छा से कब्जा हटाने का कड़ा नोटिस दिया गया था, जिसके समाप्त होते ही भारी पुलिस बल की मौजूदगी में पोकलेन और जेसीबी मशीनों से मलबे और अवैध निर्माण को ढहाने की कार्रवाई शुरू की गई. इस पूरी मुहिम के तहत लगभग 7.5 एकड़ शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जा रहा है.
हाल ही में हुए हाईटेक ड्रोन सर्वे और राजस्व विभाग की सघन जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि जो तांदुला नदी मूल रूप से 220 मीटर चौड़ी थी, वह अवैध कब्जों और खेती के कारण सिकुड़कर मात्र 80 से 90 मीटर रह गई थी.
जांच में यह भी सामने आया कि अधिकांश अतिक्रमणकारी आर्थिक रूप से सक्षम हैं और कुछ रसूखदारों द्वारा इस शासकीय भूमि पर कब्जा कर इसे दूसरों को बटाई या किराए पर दिया गया था.
नदी क्षेत्र की इस साढ़े सात एकड़ भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए खेतों की मेड़ों को तोड़कर नदी के समानांतर समतलीकरण का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है, ताकि इस पूरे डूब क्षेत्र में पुनः जलभराव कर नदी की पुरानी जल संचय क्षमता और प्राकृतिक सौंदर्य को लौटाया जा सके.
गौरतलब है कि कुछ महीने पहले खेतों में खड़ी धान की फसल के कारण मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इस मुहिम को अस्थाई रूप से रोका गया था, जिसे फसल कटते ही त्वरित रूप से दोबारा अंजाम दिया गया.
इस बड़ी कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसडीएम, एसडीओपी और तहसीलदार सहित तीनों विभागों के सैकड़ों अधिकारी और कर्मचारी मौके पर मुस्तैद रहे.