मतदाताओं को डराने-धमकाने की शिकायत पर तुरंत होगा री-पोल
नई दिल्ली । डेस्क: भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि मतदाताओं को डराने-धमकाने या उनके मताधिकार में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप का कोई भी संकेत मिलता है, तो उसे पुनर्मतदान के लिए वैध आधार माना जाएगा.
अब तक केवल 'असाधारण परिस्थितियों' में ही री-पोल के आदेश दिए जाते थे, लेकिन नई नीति के तहत आयोग किसी भी अप्रिय घटना की सूचना मिलते ही 'सुओ-मोटु' संज्ञान लेकर तुरंत पुनर्मतदान का फैसला कर सकता है.
निर्वाचन आयोग के सूत्रों के अनुसार, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 58(A) और 135(A) के तहत आयोग के पास बूथ कैप्चरिंग, प्रॉक्सी वोटिंग और मतदाताओं को रोकने जैसी स्थितियों में चुनाव को शून्य घोषित करने का पूर्ण अधिकार है.
पहले री-पोल का निर्णय मुख्य रूप से पीठासीन अधिकारियों की रिपोर्ट पर निर्भर होता था, जिससे कई बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई में देरी होती थी.
हालांकि, अब यदि मतदाता धमकियों के कारण मतदान केंद्र तक नहीं पहुँच पाते हैं, तो वे दूरस्थ माध्यम से भी पर्यवेक्षकों या आयोग को शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए उस बूथ के मतदान को रद्द कर दिया जाएगा.
पश्चिम बंगाल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में चुनाव प्रक्रिया को किसी भी प्रकार के 'फाउल प्ले' से मुक्त रखने के लिए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.