कांगो में पैर पसार रहा है इबोला वायरस, महामारी का खतरा बढ़ा
किंशंसा । डेस्क: डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) के उत्तर-पूर्वी इलाकों में इबोला वायरस का संक्रमण तेजी से नए क्षेत्रों में फैल रहा है. एक भीड़भाड़ वाले शरणार्थी शिविर (विस्थापित कैंप) में इस घातक वायरस के पहुंचने से हड़कंप मच गया है, जिसने अब एक बेहद खतरनाक और व्यापक रूप ले लिया है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दी है कि बेहद दुर्लभ 'बुंडिबुग्यो' (Bundibugyo) स्ट्रेन के कारण फैली इस महामारी का अब स्थानीय स्तर पर सामुदायिक प्रसार (लोकल कम्युनिटी स्प्रेड) शुरू हो चुका है, जबकि इसके मुकाबले प्रशासनिक बचाव और राहत कार्य काफी पीछे नजर आ रहे हैं.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बीती 15 मई को इस आउटब्रेक की घोषणा होने के बाद से अब तक महामारी के केंद्र इतुरी प्रांत के साथ-साथ उत्तर और दक्षिण कीवू प्रांतों में इबोला के 676 पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 136 लोगों की मौत हो चुकी है. इसके अलावा 119 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि केवल 32 मरीज ही अब तक ठीक हो पाए हैं.
WHO के महामारी विज्ञान और विश्लेषण प्रमुख ओलिवियर ले पोलेन ने बताया कि इन तीनों प्रांतों के नए स्वास्थ्य क्षेत्रों में लगभग हर दिन संक्रमण के नए मरीज मिल रहे हैं.
उन्होंने चिंता जताई कि जनसंख्या की अत्यधिक आवाजाही के कारण महामारी का वास्तविक पैमाना मौजूदा आंकड़ों से कहीं अधिक बड़ा हो सकता है. फिलहाल इस विशिष्ट बुंडिबुग्यो प्रजाति के वायरस के लिए कोई स्वीकृत टीका या सटीक इलाज मौजूद नहीं है.
कांगो में हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि मरीजों को आइसोलेट करने के लिए बेड की क्षमता जरूरत के मुकाबले बेहद कम है. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने इतुरी प्रांत के घनी आबादी वाले 'क्पांगा' विस्थापित शिविर में इबोला से हुई पहली मौतों की पुष्टि की है, जहां मई के अंत और जून की शुरुआत में मरीजों ने दम तोड़ा.
इस कैंप में बुनियादी सुविधाओं के अभाव और बेहद तंग हालातों के चलते तेजी से संक्रमण फैलने का डर सता रहा है.
दशकों के गृहयुद्ध और सशस्त्र विद्रोहियों की मौजूदगी के कारण इस क्षेत्र में स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा पहले ही पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है, जिससे राहत कार्यों में बड़ी बाधा आ रही है. कांगो के इन बिगड़ते हालातों ने पड़ोसी देश युगांडा की भी चिंता बढ़ा दी है, जहां पहले ही इबोला के 19 मामले सामने आ चुके हैं.