दुर्ग: जेके लक्ष्मी सीमेंट माइंस में श्रमिक की मौत, 50 लाख मुआवजे की मांग
दुर्ग । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित जेके लक्ष्मी सीमेंट माइंस में ड्यूटी के दौरान एक श्रमिक की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई. इस घटना के बाद मृतक के परिजनों ने कंपनी प्रशासन पर इलाज में देरी और घोर लापरवाही बरतने का गंभीर आरोप लगाया है. उचित मुआवजे की मांग पूरी न होने तक नाराज परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से साफ इंकार कर दिया है, जिसके चलते फिलहाल अस्पताल में गतिरोध की स्थिति बनी हुई है.
प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंचकर मामले को शांत कराने और दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता करने में जुटी है.
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, नंदिनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली इस माइंस में यह दुखद हादसा हुआ. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर ने बताया कि श्रमिक की मौत के बाद उपजे विवाद को सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं.
परिजनों और माइंस प्रबंधन के बीच मुआवजे की राशि को लेकर बातचीत का दौर जारी है. पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच कर रही है ताकि मौत के सही कारणों का पता लगाया जा सके.
मृतक की पहचान सेमरिया गिरहोला ग्राम के रहने वाले 56 वर्षीय छन्नू लाल देवांगन के तौर पर हुई है, जो बीते 15 सालों से माइंस में एक ठेकेदार के मातहत काम कर रहे थे.
मृतक के बेटे जितेंद्र देवांगन ने बताया कि उनके पिता ही घर के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे, जिन पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी.
परिजनों का गुस्सा इस बात को लेकर भी है कि इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी कंपनी का कोई वरिष्ठ अधिकारी या जिम्मेदार प्रतिनिधि मर्चुरी (शवगृह) में पीड़ित परिवार से मिलने नहीं पहुंचा.
परिजनों ने माइंस परिसर के भीतर बुनियादी चिकित्सा व्यवस्थाओं पर भी बड़े सवाल खड़े किए हैं. उनका आरोप है कि यदि कार्यस्थल पर ही समय रहते प्राथमिक उपचार मिल जाता, तो शायद छन्नू लाल की जान बचाई जा सकती थी.
बताया जा रहा है कि 4 जून की सुबह करीब 8:30 बजे छन्नू लाल अपनी शिफ्ट पर गए थे, जहां दोपहर 12 बजे के आसपास काम करते वक्त वे अचानक अचेत होकर गिर पड़े. वहां मौजूद सहकर्मियों ने उन्हें संभालने की कोशिश की, लेकिन हालत बिगड़ती चली गई. आरोप है कि कंपनी ने परिजनों को इसकी सूचना दोपहर 2 बजे के बाद दी.
हादसे के बाद श्रमिक को पहले वहां से 5 किलोमीटर दूर जेके लक्ष्मी सीमेंट के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन स्थिति नाजुक होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें भिलाई के पल्स हॉस्पिटल के लिए रेफर कर दिया.
वहां पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. फिलहाल, 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग को लेकर परिजन अपनी जिद पर अड़े हुए हैं और पुलिस प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है.