शनि, 17 अक्टू. 2026

CGKhabar

शहीद की माँ को पेंशन से वंचित करना घोर अन्याय: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

C

CG Khabar

13 फ़र. 2026, 07:06 AM 2 मिनट में पढ़ें 1

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में व्यवस्था दी है कि देश के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले शहीद की माँ को पेंशन से वंचित करना घोर अन्याय है. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने जशपुर जिले की 68 वर्षीय फिलिसिता लकड़ा की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर पेंशन और पिछले सभी बकाये का भुगतान करने का आदेश दिया है. 


यह मामला साल 2002 में नक्सली हमले में शहीद हुए 10वीं बटालियन के आरक्षक इग्नासियस लकड़ा से जुड़ा है. शहीद के पिता लोबिन लकड़ा को उनकी मृत्यु तक पेंशन मिल रही थी, लेकिन 2020 में उनके निधन के बाद प्रशासन ने शहीद की माँ को यह लाभ देने से इनकार कर दिया था.


ट्रेजरी ऑफिसर ने 1965 के पुलिस नियमों का हवाला देते हुए तर्क दिया था कि पिता की मृत्यु के बाद माँ को पेंशन हस्तांतरित करने का प्रावधान नहीं है. 


हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि सिविल सेवा के अन्य कर्मचारियों के लिए बने 1963 के नियमों में पिता के बाद माँ को पेंशन देने का स्पष्ट प्रावधान है, ऐसे में पुलिसकर्मियों के परिजनों के साथ भेदभाव असंवैधानिक है. 


हाईकोर्ट ने "हार्मोनियस कंस्ट्रक्शन" के सिद्धांत को अपनाते हुए कहा कि पुलिसकर्मी जोखिम भरे माहौल में काम करते हैं, इसलिए उनके परिवारों को अन्य कर्मचारियों की तुलना में नुकसान नहीं होना चाहिए. अदालत ने स्पष्ट किया कि 1963 के लाभकारी प्रावधानों को 1965 के नियमों में भी पढ़ा जाना चाहिए, जिससे शहीद की बुजुर्ग माँ को चार साल के लंबे संघर्ष के बाद न्याय मिल सका है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP