दिल्ली और मुंबई में सर्वाधिक भू-स्तरीय ओजोन प्रदूषण: CPCB रिपोर्ट
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने हाल ही में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को सूचित किया कि 2023 में 10 शहरों में 178 निगरानी स्टेशनों में से 65 ने ओजोन के सुरक्षित स्तर को पार कर लिया, जिसमें दिल्ली और मुंबई में सबसे अधिक उल्लंघन दर्ज किए गए.
सीपीसीबी ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर और मुंबई महानगरीय क्षेत्रों में अन्य क्षेत्रों की तुलना में ओजोन सांद्रता के उल्लंघन अधिक देखे गए. दिल्ली में 57 में से 25 स्टेशनों और मुंबई में 45 में से 22 स्टेशनों पर ओजोन का स्तर आठ घंटे के लिए 2 प्रतिशत की सुरक्षित सीमा से अधिक था. कोलकाता में 10 में से 1 स्टेशन पर सुरक्षित सीमा का उल्लंघन हुआ, जिसके कारण यह शहर सूची में छठे स्थान पर रहा.
यह ताजा रिपोर्ट 2 प्रतिशत उल्लंघन बेंचमार्क पर आधारित है, जो पहले की 5 प्रतिशत उल्लंघन गणना की तुलना में अधिक संवेदनशील मापदंड है. इससे ओजोन प्रदूषण और इसके मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है.
सीपीसीबी के अनुसार, ऊंचे ओजोन स्तर का कारण परिवहन क्षेत्र, बिजली संयंत्र और औद्योगिक गतिविधियों से होने वाला उत्सर्जन हो सकता है. इसके अतिरिक्त, ओजोन के अग्रदूत प्राकृतिक स्रोतों से भी उत्पन्न हो सकते हैं, जैसे कि जैविक उत्सर्जन से वाष्पशील कार्बनिक यौगिक, मिट्टी से नाइट्रोजन ऑक्साइड, जंगल की आग से कार्बन मोनोऑक्साइड, और जैवमंडल से मीथेन उत्सर्जन. सीपीसीबी ने कहा, “ट्रोपोस्फेरिक या भू-स्तरीय ओजोन मुख्य रूप से दो प्रमुख वायु प्रदूषकों, वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों और नाइट्रोजन ऑक्साइड के बीच जटिल गैर-रैखिक फोटोकैमिकल प्रतिक्रियाओं से बनता है.”
यह रिपोर्ट एनजीटी के एक स्वतः संज्ञान मामले के जवाब में प्रस्तुत की गई थी, जो भारतीय शहरों में बढ़ते भू-स्तरीय ओजोन प्रदूषण पर एक समाचार रिपोर्ट पर आधारित था. (फोटो- प्रतीकात्मक)