शनि, 17 अक्टू. 2026

CGKhabar

पतंजलि को डाबर के खिलाफ विज्ञापन हटाना होगा

C

CG Khabar

03 जुल. 2025, 01:02 PM 2 मिनट में पढ़ें 3

पतंजलि बाबा रामदेव
पतंजलि बाबा रामदेव

नई दिल्ली । डेस्क: दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को पतंजलि आयुर्वेद को डाबर के च्यवनप्राश उत्पादों के खिलाफ अपमानजनक विज्ञापनों को हटाने का अंतरिम आदेश जारी किया. यह आदेश डाबर द्वारा दायर एक मुकदमे के जवाब में आया, जिसमें आरोप लगाया गया कि पतंजलि ने उनके उत्पादों को बदनाम करने वाले विज्ञापन चलाये हैं.


न्यायमूर्ति मिनी पुष्करण ने यह आदेश पारित किया. विवाद तब शुरू हुआ जब पतंजलि ने अपने संस्थापक स्वामी रामदेव की एक विज्ञापन प्रसारित किया, जिसमें उन्होंने बाजार में उपलब्ध अन्य च्यवनप्राश उत्पादों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाये. विज्ञापन में कहा गया, “जिन्हें आयुर्वेद और वेदों का ज्ञान नहीं, वे चारक, सुश्रुत, धन्वंतरि और च्यवनऋषि की परंपरा में ‘मूल’ च्यवनप्राश कैसे बना सकते हैं?”


डाबर ने पतंजलि के विज्ञापनों में 40 जड़ी-बूटियों वाले च्यवनप्राश को “साधारण” कहने पर आपत्ति जताई. जिसे उन्होंने अपने उत्पाद का प्रत्यक्ष उल्लेख माना, जो “40+ जड़ी-बूटियों” का उपयोग करने का दावा करता है. च्यवनप्राश बाजार में 60 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी रखता है. डाबर ने तर्क दिया कि ये बयान तीन तरह से बदनामी करते हैं: पतंजलि की अपनी रचना को गलत तरीके से प्रस्तुत करना, डाबर की आयुर्वेदिक परंपरा के पालन पर सवाल उठाना और डाबर के उत्पाद को निम्न दर्जे का बताना.


डाबर ने कहा कि यह विज्ञापन उपभोक्ताओं को गुमराह करता है. उन्होंने बताया कि च्यवनप्राश एक शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधि है. जो ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत नियंत्रित है, जो प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों के आधार पर निर्धारित फॉर्मूलेशन का पालन करता है. अन्य ब्रांडों को “साधारण” कहना न केवल भ्रामक है, बल्कि हानिकारक भी है.


डाबर ने यह भी चिंता जताई कि विज्ञापन में गैर-पतंजलि उत्पादों के सेवन से स्वास्थ्य जोखिम होने का संकेत दिया गया है, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा के मुद्दे उठते हैं. डाबर ने सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेशों का हवाला दिया, जिसमें पतंजलि को समान विज्ञापन व्यवहार के लिए अवमानना कार्यवाही में दोषी ठहराया गया था, और तर्क दिया कि कंपनी बार-बार नियम तोड़ने वाली है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP