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घातक इंजेक्शन के बाद जीवित बची मृत्युदंड की कैदी क्रिस्टा पाइक- आगे क्या?

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07 अक्टू. 2026, 07:59 PM 5 मिनट में पढ़ें 3

 क्रिस्टा पाइक
क्रिस्टा पाइक

नैशविले (अमेरिका) । डेस्क: अमेरिका की जेल में घातक इंजेक्शन (लीथल इंजेक्शन) दिए जाने के बाद भी जीवित बच जाने वाली मृत्युदंड की कैदी क्रिस्टा पाइक अब अस्पताल में होश में हैं और बातचीत कर रही हैं. 50 वर्षीया पाइक को 1995 में अपनी सहपाठी की बेरहमी से हत्या करने के जुर्म में मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी. अमेरिका में मृत्युदंड के आंकड़ों पर नजर रखने वाली संस्था 'डेथ पेनल्टी इंफॉर्मेशन सेंटर' के अनुसार, पाइक देश के इतिहास में पहली ऐसी कैदी बन गई हैं जो घातक दवाओं की दोहरी खुराक शरीर में जाने के बावजूद जीवित बच गई हैं. इस अभूतपूर्व घटना ने पाइक के कानूनी और चिकित्सीय भविष्य को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं.


अस्पताल में चल रहा इलाज, डॉक्टरों ने बताया चिकित्सीय चमत्कार


नैशविले के एक अस्पताल में कड़ी सुरक्षा के बीच पाइक का इलाज जारी है. 30 सितंबर को नैशविले स्थित रिवरबेंड मैक्सिमम सिक्योरिटी प्रिजन में जब इंजेक्शन देने की प्रक्रिया विफल हुई, तो उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल भर्ती कराया गया था. अस्पताल पहुंचते समय उनकी बांहें बुरी तरह सूजी हुई, झुलसी और छालों से भरी थीं. पाइक के वकीलों का कहना है कि हथकड़ियों और बेड़ियों से जकड़ी होने के बावजूद पाइक अब होश में आ चुकी हैं. वकीलों ने उनके इस तरह उबरने को चिकित्सा विज्ञान की दृष्टि से "अभूतपूर्व" बताया है, हालांकि उनकी स्थिति पूरी तरह से कब तक ठीक होगी, इस पर डॉक्टरों का रुख अभी अनिश्चित है.

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क्या थी सजा की वजह और पाइक की पुरानी मांगें?


पाइक को वर्ष 1995 में अपने एक साथी के साथ मिलकर अपनी ही 19 वर्षीया सहपाठी कोलीन स्लैमर्स की प्रताड़ित कर हत्या करने के आरोप में मौत की सजा दी गई थी. घटना के समय पाइक की उम्र महज 18 वर्ष थी. निष्पादन की तारीख तय होने के बाद से ही उनका मामला काफी चर्चा में था, क्योंकि अगर यह प्रक्रिया पूरी हो जाती तो वह बीते 200 से अधिक वर्षों में टेनेसी राज्य द्वारा फांसी दिए जाने वाली पहली महिला होतीं.


इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि निष्पादन की प्रक्रिया से काफी पहले ही पाइक और उनके कानूनी प्रतिनिधियों ने अदालत से यह गुहार लगाई थी कि उन्हें घातक इंजेक्शन न दिया जाए. पाइक ने मांग की थी कि उन्हें गोलियों से भूनकर मृत्युदंड दिया जाए और यह भी शर्त रखी थी कि गोली मारने वाली टीम में केवल महिलाएं ही शामिल हों. उस दौरान यह बात सार्वजनिक रूप से सामने आई थी कि पाइक की नसें बेहद पतली और कमजोर हैं तथा उन्हें 'थ्रोम्बोसाइटोसिस' नामक रक्त विकार है. इस बीमारी में नसों में सुई लगाना बेहद कठिन होता है और जहरीले रसायन का असर न होने या प्रक्रिया के विफल होने का भारी जोखिम रहता है. हालांकि, अधिकारियों ने उनकी इस मांग और चिंताओं को खारिज कर दिया था.


मृत्युदंड के कमरे में उस रात क्या हुआ?


30 सितंबर की शाम करीब 7:30 बजे नैशविले की जेल में पाइक को मौत की नींद सुलाने की प्रक्रिया शुरू हुई. उन्हें पेंटोबार्बिटल रसायन की खुराक दी गई. इंजेक्शन दिए जाने के कुछ ही मिनटों बाद, लगभग 7:35 बजे पाइक ने अपना सिर उठाया और दर्द से तड़पते हुए कहा कि उनकी बांह में भयानक जलन हो रही है.


टेनेसी के नियमों के अनुसार यदि पहली खुराक में कैदी की मौत न हो, तो दूसरी खुराक देने का प्रावधान है. अधिकारियों ने दूसरा डोज भी दिया, लेकिन घंटों बीत जाने के बाद भी पाइक की सांसें चलती रहीं और उनके खर्राटे लेने की आवाजें आती रहीं. करीब 8:53 बजे गवाहों और मीडिया को बाहर निकाला गया और रात 9:14 बजे एम्बुलेंस के जरिए पाइक को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया. विशेषज्ञों का मानना है कि नसों की कमजोरी के कारण आईवी (IV) लाइन सही जगह पर नहीं लग सकी, जिससे घातक दवाएं सीधे खून में मिलने के बजाय आसपास के मांस और ऊतकों में जमा हो गईं.


वकीलों की कानूनी रणनीति और सजा रद्द करने की मांग


पाइक के वकील अब कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं. वे मांग कर रहे हैं कि निष्पादन के दौरान इस्तेमाल किए गए सभी सबूतों-जैसे सुइयों, दवाओं के बैच नंबर और जेल के आधिकारिक लॉग-को सुरक्षित रखा जाए. वकीलों का कहना है कि एक बार मौत के मुंह से बाहर आने के बाद दोबारा निष्पादन की कोशिश करना "क्रूर और असामान्य सजा" के दायरे में आता है. वे इस आधार पर पाइक की मृत्युदंड की सजा को बिना पैरोल वाली उम्रकैद में बदलने की मांग कर रहे हैं.


सरकार और शासन का रुख


टेनेसी के रिपब्लिकन गवर्नर बिल ली ने इस पूरे घटनाक्रम को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए मामले की स्वतंत्र जांच के आदेश दिए हैं. इसके साथ ही राज्य में इस साल होने वाली अन्य सभी निष्पादन प्रक्रियाओं पर रोक लगा दी गई है. मामले की गाज गिरते देख टेनेसी करेक्शन विभाग के कमिश्नर फ्रैंक स्ट्राडा ने भी अपने पद से इस्तीफा देने की सहमति दे दी है. वहीं, राज्य की राजनीति में इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि क्या घातक इंजेक्शन की जगह मृत्युदंड के अन्य तरीकों पर विचार किया जाना चाहिए.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP