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करोड़ों खर्च के बावजूद बेहाल दलपत सागर

छत्तीसगढ़ के जगदलपुर का दलपत सागर तालाब निगम के लिए पैसों की खान बना

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06 अप्रै. 2025, 01:10 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

करोड़ों खर्च के बावजूद बेहाल दलपत सागर

जगदलपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े तालाबों में शुमार जगदलपुर में स्थित ऐतिहासिक दलपत सागर में करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद तालाब से जलकुंभी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है.


नगर निगम इस तालाब की सफाई और जलकुंभी हटाने में नाकाम साबित हो रहा है. आलम यह है कि करीब 175 एकड़ में फैले इस तालाब में पानी कम जलकुंभी ज्यादा दिखाई दे रही है.


हर महीने इस तालाब से जलकुंभी हटाने के नाम पर वीड हार्वेस्टर मशीन के ईंधन के लिए लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं. लेकिन तालाब की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं नजर आ रहा है.


तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इस तालाब को राम वनगमन पथ से जोड़कर करीब 3 करोड़ का बजट दिया और इस बजट में केवल तालाब के ऊपर बने आईलैंड का ही जीर्णोद्धार किया गया.


अब यह तालाब निगम की लापरवाही के चलते धीरे-धीरे सिमटने के साथ अतिक्रमण का भी शिकार हो रहा है.


सफाई के नाम पर हर महीने लाखों खर्च 

दरअसल छत्तीसगढ़ में जब कांग्रेस की सरकार थी, उस वक्त 3 करोड़ रुपए दलपत सागर की सफाई और उसके सौंदर्यीकरण के लिए आवंटित किये गये थे.


नगर निगम प्रशासन ने लाखों की लागत से विड हार्वेस्टिंग मशीन की खरीदी की और हर रोज यह मशीन जलकुंभी निकालने के लिए तालाब में चलाई जाती है.


इस मशीन में हर महीने लाखों रुपये ईंधन के लिए खर्च होते हैं. बावजूद इसके दलपत सागर में जलकुंभी जस की तस बनी हुई है.


नालों के माध्यम से शहर से निकलने वाला गंदा पानी भी दलपत सागर में ही बहाया जाता है. जिस वजह से जलकुंभी लगातार पनप रही है.


सालों से चल रहा दलपत सागर की सफाई का प्रयास अभी भी विफल नजर आ रहा है.


हालांकि नगर निगम के महापौर संजय पांडे नए सिरे से काम शुरू करने की बात जरूर कह रहे हैं और जल्द ही दलपत सागर से जलकुंभी को साफ कर लेने का दावा कर रहे हैं. 


पर वर्तमान में तो दलपत सागर के हालात खराब हैं. 

बीते 3 सालों से चलाई जा रही वीड हार्वेस्टर मशीन

दरअसल 80 लाख रुपये की लागत से खरीदी गई विड हार्वेस्टर मशीन पिछले तीन सालों से अब तक इस सागर से जलकुंभी को पूरी तरह से हटा नहीं पाई है.


हर महीने नगर निगम इस वीड हार्वेस्टर मशीन के लिए लाखों रुपए ईंधन में खर्च कर रहा है,लेकिन स्थिति यह है कि अब तक दलपत सागर के आधे हिस्से से भी जलकुंभी को हटाया नहीं जा सका है.


दलपत सागर बचाओ अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि निगम प्रशासन विड हार्वेस्टर मशीन के माध्यम से जलकुंभी हटाने का प्रयास तो जरूर कर रहा है, लेकिन बेहतर कार्ययोजना के अभाव में दलपत सागर से जलकुंभी हटा पाने में निगम सरकार फेल साबित हो रही है.


निगम प्रशासन को चाहिए कि बेहतर कार्य योजना तैयार कर इस दलपत सागर से जलकुंभी को हटाने के साथ ही चारों तरफ हुए अतिक्रमण को हटाकर इसे वापस इसके मूल रूप में लाना चाहिए.


इधर महापौर संजय पांडे के बुलावे पर दिल्ली से बस्तर पहुंचे तालाबों के जानकार रामवीर तंवर ने निगम के जनप्रतिनिधियों के साथ दलपत सागर का निरीक्षण किया. रामवीर तंवर ने कहा कि उन्होंने इससे पहले कई तालाबों का जीर्णोद्धार किया है और उसके लिए एक्सपर्ट पॉवर के साथ ही मशीन का उपयोग सबसे ज्यादा जरूरी होता है.


उन्होंने कहा कि यहां सबसे ज्यादा जरूरी शहर से निकलने वाले बड़े नालों के गंदे पानी को दलपत सागर में जाने से रोकना है. क्योंकि नालों के पानी से ही जलकुंभी पनपती है. उन्होंने दावा किया है कि आने वाले 6 महीने में दलपत सागर से जलकुंभी हटाई जा सकती है.


साथ ही इसे पूरी तरह से साफ करने में एक से 2 साल का समय लग सकता है.


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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP