देश के 12 राज्य नहीं देते केंद्रीय दर पर DA- प. बंगाल सरकार
कोलकाता । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट में डीए (मंहगाई भत्ता) मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है, लेकिन फैसला सुरक्षित रखा गया है. इस बीच, पश्चिम बंगाल सरकार ने अपनी लिखित दलील सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है. उसमें बताया गया है कि देश के कम से कम 12 राज्य सरकारी कर्मचारियों को केंद्रीय दर पर डीए नहीं देते हैं.
पश्चिम बंगाल सरकार ने सूची भी सौंपी है, जिसमें कर्नाटक और केरल को छोड़कर अधिकांश राज्य भाजपा शासित या भाजपा गठबंधन वाले हैं.
इन राज्यों में छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड, सिक्किम, तेलंगाना और त्रिपुरा शामिल हैं.
पश्चिम बंगाल सरकार ने तर्क दिया कि कर्मचारियों को डीए से वंचित नहीं किया जाता, बल्कि राज्य की वित्तीय क्षमता और प्राथमिकताओं के अनुसार भत्ता दिया जाता है.
संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत प्रत्येक राज्य को अपने कर्मचारियों का वेतन और भत्ता तय करने का अधिकार है. केंद्र के डीए नियमों का पालन करना राज्यों के लिए अनिवार्य नहीं है.
पश्चिम बंगाल सरकार ने यह भी कहा कि डीए कोई मौलिक अधिकार नहीं है, बल्कि कर्मचारियों को उतना ही दावा किया जा सकता है, जितना राज्य की अधिसूचना या सेवा नियमों में दिया गया है.
साथ ही, जिन राज्यों में ‘रिवीजन ऑफ पे एंड अलाउंसेस’ (ROPA) नियमों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) का उल्लेख है, वहां भी डीए दरों में असमानता पाई जाती है. उदाहरण के तौर पर, छत्तीसगढ़, मेघालय, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम का उल्लेख किया गया है.