तपकरा में आकार लेगा देश का अनूठा सर्प ज्ञान केंद्र
जशपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में स्थित तपकरा, जिसे लोग 'नागलोक' के नाम से जानते हैं, जल्द ही सर्प संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन का एक मुख्य केंद्र बनने जा रहा है. यहां के नागलोक रेस्ट हाउस में हाल ही में वन विभाग के उच्च अधिकारियों और प्रसिद्ध सर्प विशेषज्ञों के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई.
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रस्तावित सर्प ज्ञान केंद्र की रूपरेखा तैयार करना और इसे केवल एक प्रदर्शनी स्थल न बनाकर शोध, वैज्ञानिक अध्ययन व जन-जागरूकता के एक प्रभावी मंच के रूप में विकसित करना है.
इस केंद्र का सबसे महत्वपूर्ण पहलू स्थानीय सर्प मित्रों और वनकर्मियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रशिक्षित करना होगा. अक्सर सर्प रेस्क्यू के दौरान हादसों की आशंका बनी रहती है, जिसे ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण के दौरान सर्पों की सटीक पहचान, रेस्क्यू के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक प्रक्रियाओं (SOP) का पालन और मानव-सर्प संघर्ष के समय सही त्वरित प्रतिक्रिया देने के गुर सिखाए जाएंगे.
वन विभाग का मानना है कि इससे जहां एक ओर सर्प मित्रों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर त्वरित और सुरक्षित रेस्क्यू संचालन में विभाग व सर्प मित्रों के बीच समन्वय पहले से ज्यादा मजबूत होगा.
इसके साथ ही, समाज में सांपों को लेकर व्याप्त विभिन्न अंधविश्वासों और भ्रांतियों को दूर करने के लिए विशेष शैक्षणिक अभियानों की योजना बनाई गई है. विद्यार्थियों, युवाओं और ग्रामीणों के लिए यहां नियमित जागरूकता कार्यक्रम और जैव विविधता से जुड़ी गतिविधियां आयोजित होंगी.
बैठक में सर्प विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार शर्मा और आयुष मान शर्मा ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए स्थानीय प्रजातियों के व्यवहारिक अध्ययन और वैज्ञानिक अनुसंधान को प्राथमिकता देने पर बल दिया.
जशपुर के डीएफओ शशि कुमार, सरगुजा सीसीएफ दिलराज प्रभाकर और छत्तीसगढ़ फॉरेस्ट फोर्स के प्रमुख (पीसीसीएफ) अरुण कुमार पाण्डेय की उपस्थिति में हुई इस चर्चा ने तपकरा को पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के वैश्विक मानचित्र पर उभारने की एक ठोस नींव रख दी है.