बस्तर में रेडी टू ईट वितरण में लाखों का भ्रष्टाचार
छत्तीसगढ़ के बस्तर में रेडी टू ईट वितरण में स्वसहायता समूह की महिलाओं के साथ भ्रष्टाचार
जगदलपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में सुपोषण अभियान के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में दिये जाने वाले रेडी टू ईट वितरण में लाखों रुपए का भ्रष्टाचार करने का मामला सामने आया है.
दरअसल तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने रेडी टू ईट निर्माण का काम ठेका पद्धति में दे दिया था और महिला स्व-सहायता समूह को प्राइवेट कंपनी के वेंडर के जरिये इसके वितरण का जिम्मा सौंपा था. जिसके एवज में समूह की महिलाओं को प्रति किलो रेडी टू ईट में डेढ़ रुपए की आमदनी दी जानी थी.
साल 2022 से अब तक संभाग की 200 से अधिक स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को उनका मानदेय नहीं मिला. रेडी टू ईट वितरण के लिए निजी कंपनी ने छत्तीसगढ़ में रूपेश कुमार को वेंडर का काम दिया था. रुपेश कुमार ने बस्तर संभाग में जगदलपुर के रहने वाले आनंद शुक्ला को काम दिया था.
सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में रेडी टू ईट पहुंचाने के लिए महिला स्व-सहायता समूहों को मानदेय दिया जाना था. लेकिन वेंडर आनंद शुक्ला ने इन महिलाओं को उनका मानदेय ही नहीं दिया.
जानकारी के मुताबिक इस वेंडर ने लगभग 60 लाख रुपये की राशि गबन कर ली. इसका खुलासा तब हुआ जब इस प्राइवेट कंपनी के कर्मचारी जगदलपुर पहुंचे और इसके बाद स्वसहायता समूह की महिलाओं से उनकी मुलाकात हुई.
महिलाओं का कहना है कि उन्होंने इसकी शिकायत जिला प्रशासन से भी की थी, लेकिन इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई. फिलहाल इस निजी कंपनी के छत्तीसगढ़ मार्केटिंग हेड रूपेश कुमार और उनके कर्मचारियों ने महिलाओं को आश्वासन दिया है कि 7 दिन के भीतर उनकी बकाया राशि दे दी जाएगी.
साथ ही बस्तर संभाग के वेंडर आनंद शुक्ला से भी 7 दिनों के अंदर जवाब मांगा जाएगा.
पिछले 3 सालों से नहीं मिला मानदेय
दरअसल तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने साल 2022 में रेडी टू ईट निर्माण का काम स्वसहायता समूहों से छीन लिया था.
इस दौरान विधानसभा में जमकर बवाल भी हुआ. तत्कालीन सरकार में महिला बाल विकास मंत्री रहे अनिला भेड़िया ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का जिक्र करते हुए रेडी टू ईट के निर्माण का कार्य अब मानव रहित मशीनों के माध्यम से करने की बात कही थी.
हालांकि आंगनबाड़ी केंद्रों में इसके वितरण का कार्य जरूर महिला स्वसहायता समूह को दिया गया.
इस ठेका पध्दति में एग्रो फूड बीज निगम की हिस्सेदारी 26% और निजी कंपनी पीबीएस फूड प्राइवेट लिमिटेड की हिस्सेदारी 74 फ़ीसदी थी.
बस्तर संभाग में 200 से अधिक स्व सहायता समूहों को आंगनबाड़ी केंद्रों में रेडी टू ईट पहुंचाने का काम दिया गया.
इन स्व सहायता समूह की महिलाओं का कहना है कि साल 2022 से अब तक उन्हें एक रुपये भी मानदेय नहीं मिला है.
कई बार समूह की महिलाओं ने बस्तर संभाग के वेंडर आनंद शुक्ला से भी मानदेय देने की गुहार लगाई.
जबकि आनंद शुक्ला कंपनी से पैसे नहीं मिलने की बात कहते हुए टालते गया. इसके बाद महिलाओं ने जिला प्रशासन से भी उन्हें मानदेय नहीं मिलने की शिकायत की, लेकिन इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई.
31 मार्च तक बकाया राशि देने का मिला आश्वासन
इधर लगातार बढ़ते विवाद को देखते हुए छत्तीसगढ़ में रेडी टू ईट सप्लाई करने वाली एजेंसी से जुड़े लोग और कंपनी के छत्तीसगढ़ हेड रूपेश कुमार ने महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं के साथ रविवार को आनन फानन में बैठक की.
महिला समूहों की सदस्यों को मां दंतेश्वरी मंदिर के समक्ष बुलाकर इस कम्पनी से जुड़े लोगों ने बकाया भुगतान के लिए 31 मार्च तक का समय मांगा.
रूपेश कुमार ने कहा कि बस्तर संभाग में सप्लाई करने का जिम्मा जिसे दिया गया था. उसने समूहों तक पैसा नहीं पहुंचाया.
इसके बाद अब एजेंसी ने संबंधित सप्लायर के भुगतान को रोक दिया है और इस विवाद का समाधान करने के लिए प्रयास किया जा रहा है.
साथ ही उन्होंने कहा कि वेंडर आनंद शुक्ला को भी नोटिस भेजकर 7 दिनों के अंदर जवाब मांगा जा रहा है.