धान खरीदी में 'कुप्रबंधन', कांग्रेस का बहिष्कार
धान खरीदी में 'कुप्रबंधन' का आरोप लगाकर कांग्रेस का बहिष्कार
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में चल रही धान खरीदी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कांग्रेस पार्टी ने सोमवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया. विपक्ष के नेता चरण दास महंत और अन्य कांग्रेस विधायकों ने शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाया और सरकार पर उचित व्यवस्था करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए धान खरीदी पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव पेश किया.
विपक्ष ने आरोप लगाया कि किसान अपनी उपज बेचने के लिए टोकन प्राप्त करने में संघर्ष कर रहे हैं, और वन अधिकार प्रमाण पत्र (FRCs) धारक किसानों का धान नहीं खरीदा जा रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मामले को गंभीर बताते हुए किसानों से सीधा जुड़ा बताया और विस्तृत चर्चा की मांग की.
स्पीकर रमन सिंह ने बाद में प्रस्ताव की स्वीकार्यता पर चर्चा की अनुमति दी. कांग्रेस विधायकों ने दावा किया कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 15 नवंबर को शुरू हुई थी, लेकिन किसानों को शुरू से ही जिस स्तर के कुप्रबंधन का सामना करना पड़ रहा है, वह पिछले 25 वर्षों में अभूतपूर्व है.
उन्होंने आरोप लगाया कि पंजीकरण प्रक्रिया, जिसमें पिछले वर्षों में किसानों का डेटा स्वचालित रूप से आगे बढ़ाया जाता था, को इतना जटिल बना दिया गया है कि लगभग 5 प्रतिशत किसान अभी भी अपंजीकृत हैं, और चार लाख से अधिक भूमि रिकॉर्ड का पंजीकरण अभी भी लंबित है.
कांग्रेस विधायकों ने आगे आरोप लगाया कि ऑनलाइन पंजीकरण और टोकन जारी करने की प्रक्रिया अत्यधिक जटिल हो गई है, जिससे किसानों को भारी परेशानी हो रही है. उन्होंने महासमुंद के मनबोध नामक एक किसान का उदाहरण दिया, जिसने कथित तौर पर टोकन नहीं मिलने के बाद आत्महत्या का प्रयास किया. इसके अलावा, उन्होंने दावा किया कि फसल क्षति रिपोर्ट के आधार पर, अधिकांश सहकारी समितियां मानक 21 क्विंटल के बजाय केवल 12 से 15 क्विंटल धान प्रति एकड़ खरीद रही हैं, और आरोप लगाया कि एग्रीस्टैक पोर्टल में विसंगतियों के कारण किसान अपनी पूरी उपज बेचने में असमर्थ हैं.
बघेल ने कहा कि 14 दिसंबर तक, अनुमानित लक्ष्य 160 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले केवल 35 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई है, और 27.36 लाख पंजीकृत किसानों में से अब तक केवल 6.95 लाख किसान ही अपनी उपज बेच पाए हैं.
इन आरोपों का जवाब देते हुए, खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री दयालदास बघेल ने पलटवार करते हुए कहा कि 2,739 केंद्रों के माध्यम से धान खरीदी सुचारू रूप से की जा रही है, और अवैध परिवहन को रोकने के लिए कड़ी निगरानी की जा रही है. उन्होंने कहा कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए किसान पंजीकरण एकीकृत किसान पोर्टल और एग्रीस्टैक पोर्टल के माध्यम से किया जा रहा है, और अब तक 27.40 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 7.5 प्रतिशत अधिक है.
मंत्री ने उल्लेख किया कि एफआरसी धारकों और कुछ अन्य श्रेणियों को एग्रीस्टैक पंजीकरण से छूट दी गई है और प्रक्रिया अभी भी जारी है. उन्होंने कहा कि सरकार ने 'तुंहर टोकन' ऐप के माध्यम से 24 घंटे टोकन सुविधा शुरू की है, और 11 दिसंबर तक एमएसपी खरीदी के एवज में किसानों को ₹7,771 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है. मंत्री के जवाब के बाद, स्पीकर रमन सिंह ने स्थगन नोटिस को अस्वीकार कर दिया.
इसके बाद, महंत ने मंत्री के बयान को गलत बताया और कहा कि विपक्ष जवाब से संतुष्ट नहीं है, जिसके चलते कांग्रेस सदस्यों ने कार्यवाही का बहिष्कार किया और सदन से वॉकआउट किया.