जगदलपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनाव में उतरे सभी प्रत्याशी चाहे वह किसी पार्टी से हों या कि फिर निर्दलीय सभी चुनाव जीतने के दावे के साथ ही शहर में अभूतपूर्व विकास कराने का वादा कर रहे हैं.
पिछले चुनावों के वादों और दावों पर नजर डालें तो जनता से किये गये वादे और दावे दोनो खोखले साबित हो रहे हैं.
जगदलपुर शहर में नगर निगम के अंतर्गत ऐसे कई विकास कार्य हैं जो अधूरे पड़े हुए हैं.
शहर के हृदयस्थल कहे जाने वाले चाँदनी चौक और कोतवाली चौक में नगर निगम के द्वारा बनाई गई करोड़ों रुपए की सरकारी इमारतें मेंटेनेंस के अभाव में खंडहर हो चुकी हैं.
15 साल पहले करोड़ों रुपए की लागत से सरकारी कॉम्प्लेक्स बनाए गए थे, लेकिन निगम के अनदेखी के चलते यह खंडहर शराबियों का अड्डा बनकर रह गया है.
इन सरकारी कॉम्प्लेक्स को बनाने का उद्देश्य शहर की दुकानों को एक बिल्डिंग में शिफ्ट करना था. इसे शॉपिंग मॉल के रूप में बदलना था.
बिल्डिंग तैयार होते वक्त ही कई रसूखदारों ने इस बिल्डिंग की दुकानों को खरीद लिया और खरीदी हुई दुकानों के रेट निगम दर से नहीं बल्कि कॉमर्शियल दर पर तय होने लगे.
इतना ही नहीं कोतवाली चौक में स्थित निगम का तीन मंजिला भवन अभी भी अधूरा पड़ा हुआ है.
स्थानीय बेरोजगार युवा और शहर के नागरिक लंबे समय से इस भवन को पूरा करने की मांग करते रहे, लेकिन नगर निगम ने इन लोगों की एक न सुनी. वहीं इस भवन के बनने के बाद यहां हो रही शराबखोरी और खंडहर में तब्दील होते इस भवन के मुद्दे पर जमकर सियासी बवाल भी हुआ.
भाजपा - कांग्रेस के नेताओं में जुबानी जंग भी चली. इसके बावजूद परिणाम के रूप में कुछ भी हाथ नहीं लगा.
15 सालों से अधूरे पड़े हैं भवन
साल 2010 में निगम के एमआईसी की बैठक में करोड़ों रुपए पास कर शहर के कोतवाली चौक और चांदनी चौक में दो सरकारी कॉम्प्लेक्स बनाये गए. आलम यह है कि आज इन इमारतों को बने 15 साल बीत गए.
बावजूद इसके कोतवाली चौक में बने सरकारी कॉम्प्लेक्स को आज तक पूरा नहीं किया गया है. यह भवन अधूरा ही पड़ा हुआ है. पिछले 2 बार के नगर निगम चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनी और भाजपा आरोप लगाती रही कि कांग्रेस की सरकार इस भवन को पूरा करने और मेंटनेंस करने में पक्षपात कर रही है.
जब जगदलपुर नगर निगम में भाजपा की सरकार बनेगी तब इन दोनों ही सरकारी बिल्डिंग को सुधार कर लोगों को सौंप दिया जाएगा.
लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस की महापौर सफिरा साहू अपने 4 पार्षदों के साथ भाजपा में शामिल हो गईं और इसी के साथ निगम में सत्ता परिवर्तन हो गया. भाजपा की सरकार बन गई, इसके बाद लोगों में एक उम्मीद जरूर जगी कि अब दोनों ही सरकारी भवनों का मेंटनेंस किया जाएगा और दुकानें कम दर में स्थानीय बेरोजगार युवाओं को मिल सकेंगी. नतीजा जनता की उम्मीदें धरातल पर नहीं उतरीं और अब तक इस मामले में कोई खास पहल देखने को नहीं मिली.
अब फिर से भाजपा महापौर प्रत्याशी संजय पांडे औऱ कांग्रेस प्रत्याशी मलकीत सिंह गैदु चुनाव जीतने के बाद अधूरे पड़े भवन को 6 महीने के भीतर पूरा करने का दावा कर रहे हैं.
वहीं शहर के फुटकर व्यापारी रवीश परमार, गोपाल नथानी, विक्की राव का कहना है कि प्राइम लोकेशन में स्थित निगम की ये इमारतें किसी काम की नहीं हैं. बीते 15 साल से बने भवनों से निगम अच्छी खासी राजस्व वसूली कर सकती थी.
नगर निगम में भाजपा और कांग्रेस दोनो की सरकार रहने के बावजूद इन सरकारी कॉम्प्लेक्स को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया गया. जिस वजह से यह दोनों ही सरकारी भवन खंडहर में तब्दील हो गये और यह जगह शराबियों का अड्डा बनकर रह गयी.
निगम आयुक्त को जानकारी नहीं
निगम आयुक्त निर्भय साहू का कहना है कि नगरीय निकाय चुनाव के बाद इन दोनो कॉम्प्लेक्स की फाइल देखूंगा कि किस वजह से भवन अधूरा है. फाइल देखने के बाद ही इसकी सही जानकारी दे पाऊंगा.
गौरतलब है कि जगदलपुर नगरीय निकाय चुनाव में निगम के अंतर्गत ऐसे कई विकास कार्य हैं जो पूरी तरह से अधूरे पड़े हुए हैं.
एक तरफ महापौर प्रत्याशी जनता से वोट मांगने जोर - शोर से चुनाव प्रचार कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ वोटर निगम में अधूरे पड़े कामों को देखकर काफी नाराज दिख रहा है. फिलहाल महापौर के प्रत्याशी चुनाव जीतने के बाद इन अधूरे पड़े कामों को जल्द से जल्द पूरा करने का दावा कर रहे हैं.