कोल ब्लॉक मामला: पूर्व कोयला सचिव एच.सी. गुप्ता सहित अन्य बरी
नई दिल्ली । डेस्क: दिल्ली की एक अदालत ने छत्तीसगढ़ में फतेहपुर ईस्ट कोयला ब्लॉक के आवंटन में कथित अनियमितताओं से जुड़े एक मामले में पूर्व कोयला मंत्रालय सचिव एच.सी. गुप्ता, संयुक्त सचिव के.एस. क्रोफा, और मेसर्स आर.के.एम. पावरजेन प्राइवेट लिमिटेड नामक एक कंपनी तथा उसके निदेशक व प्रबंध निदेशक को बाइज्जत बरी कर दिया है.
राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश धीरज मोर ने 31 अक्टूबर के अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर एक "अणु मात्र भी सामग्री" उपलब्ध नहीं है जिससे यह पता चले कि आरोपी लोक सेवकों (क्रोफा और गुप्ता) का कार्य "सार्वजनिक हित के बिना" था. उन्होंने आगे कहा कि "बिना किसी स्थापित आपराधिक मनःस्थिति या बेईमान इरादे के अनियमितताओं को अपराध का रूप नहीं दिया जा सकता."
यह कथित कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले से संबंधित चौथा ऐसा मामला है जिसमें लोक सेवकों को राहत मिली है.
सीबीआई ने अगस्त 2014 में प्राथमिकी दर्ज करते हुए आरोप लगाया था कि कंपनी ने आवंटन पाने के लिए अपनी कुल संपत्ति को गलत तरीके से दर्शाया और सरकारी अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन करते हुए उसे अनुचित लाभ पहुँचाया.
सीबीआई के अनुसार, कंपनी की नेट वर्थ केवल ₹21.51 करोड़ थी, जबकि पात्रता के लिए न्यूनतम ₹500 करोड़ की आवश्यकता थी.
हालांकि, न्यायाधीश ने यह नोट किया कि कंपनी का पावर प्लांट 1,200 मेगावॉट का था और मंत्रालय के मापदंडों के अनुसार उसे ₹600 करोड़ की नेट वर्थ की आवश्यकता थी, जबकि चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा उसकी नेट वर्थ ₹1,699.41 करोड़ आंकी गई थी. अदालत ने पाया कि कंपनी ने कोई गलत बयानी नहीं की थी और वह सभी आवेदकों में से 9 में से 10 मापदंडों पर शीर्ष पर रही थी तथा आवंटन के लिए "सबसे योग्य" कंपनी थी.
न्यायाधीश ने कहा कि आपराधिक मनःस्थिति, मांग या स्वीकृति के आरोपों या साक्ष्य के अभाव में लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध आकर्षित नहीं होते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि स्क्रीनिंग कमेटी के सामूहिक निर्णय के लिए केवल दो अधिकारियों (क्रोफा और गुप्ता) को दोषी नहीं ठहराया जा सकता.