चित्रकोट महोत्सव और जल संकट से जूझती इंद्रावती
छत्तीसगढ़ के बस्तर में चित्रकोट महोत्सव और जल संकट से जूझती इंद्रावती
जगदलपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के बस्तर में हर साल की तरह इस साल भी चित्रकोट महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. इस दो दिवसीय महोत्सव में सांस्कृतिक आयोजन के साथ ही खेलकूद की गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं.
इस पूरे आयोजन में प्रशासन दिल खोलकर खर्च कर रहा है.
गौरतलब है कि जिस जगह इस महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है वहां सूखती इंद्रावती नदी को बचाने के लिए प्रशासन की तरफ से धरातल पर कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही है.
बस्तर की प्राणदायनी कही जाने वाली इंद्रावती नदी का जलस्तर लगातार कम होता जा रहा है. फरवरी माह से ही इंद्रावती नदी में जल संकट गहराने लगा है.
जिसका असर देश में मिनी नियाग्रा के नाम से मशहूर चित्रकोट जलप्रपात में भी देखने को मिल रहा है.
धीरे-धीरे चित्रकोट वाटरफॉल की धारा कम होती जा रही है, लेकिन प्रशासन इसके लिए बिल्कुल भी गंभीर नजर नहीं आ रहा है.
लिहाजा बस्तर वासियों के लिए पेयजल संकट का खतरा मंडराने लगा है.
दोनो सरकारों के बीच नहीं हुई बैठक
दरअसल लंबे समय से इंद्रावती नदी में घटते जलस्तर को लेकर बस्तरवासी सरकार को अलग - अलग तरह के आंदोलनों के माध्यम से चेताने का प्रयास कर रहे हैं.
छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य उड़ीसा सरकार के द्वारा खासकर गर्मी के मौसम में अनुबंध के खिलाफ जाकर काफी कम पानी बस्तर की ओर छोड़ा जाता है.
उड़ीसा सरकार के द्वारा इंद्रावती नदी पर जगह-जगह बैराज बनाए जाने से गर्मी के मौसम में इस नदी के तट से लगे उड़ीसा वासियों को पर्याप्त पानी मिलता है.
जिससे सिंचाई के साथ-साथ पेयजल के रूप में भी ग्रामीण इसका इस्तेमाल करते हैं.
वहीं जोरानाला में छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से स्ट्रक्चर ( बांध) का निर्माण करने के बाद बस्तर वासियों को उम्मीद थी कि गर्मी के मौसम में बस्तर को इंद्रावती नदी का पर्याप्त पानी मिल सकेगा.
इसके बावजूद पिछले कई सालों से ऐसा नहीं हो रहा है और खासकर गर्मी के मौसम में नदी में जल संकट का खतरा मंडराने लगता है.
बीते वर्ष 11 मार्च को पूर्व केंद्रीय जलशक्ति राज्य मंत्री विश्वेस्वर टुडू ने बस्तर पहुँच जोरानाला का दौरा कर छत्तीसगढ़ सरकार और तत्कालीन उड़ीसा सरकार के बीच आपसी बैठक कर इसका समाधान निकालने की बात कही थी.
साथ ही सूखती इंद्रावती नदी की हकीकत जानने बाकायदा एक एक्सपर्ट टीम का गठन करने की बात कही गयी थी.
हकीकत यह है कि अभी तक न तो दोनों राज्य सरकारों के जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के बीच बैठक हो पाई और ना ही एक्सपर्ट टीम का गठन हो सका.
नतीजतन एक बार फिर से सूखती इंद्रावती नदी को बचाने के सारे दावे फेल साबित हुए.
6 साल पहले हुआ इंद्रावती प्राधिकरण का गठन
इंद्रावती नदी को बचाने के लिए बकायदा तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 30 मई 2019 में इंद्रावती प्राधिकरण का गठन किया था.
इसके बाद कांग्रेस के कार्यकाल में जगदलपुर के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता राजीव शर्मा को इस प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया गया. राजीव शर्मा का कहना है कि कांग्रेस सरकार तेजी से सूखती इंद्रावती नदी को लेकर काफी गंभीर थी.
उपाध्यक्ष रहते उन्होंने नदी में पानी को रोकने के लिए दो जगह बैराज बनाने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा था. जिसके बाद मटनार और देउरगांव में बैराज बनाने का फैसला लिया गया.
इसमें देउरगांव में 127 करोड़ रुपए की लागत से 5 से 7 मीटर ऊंचा बैराज औऱ चित्रकोट वाटरफॉल से करीब 6 कि.मी पहले मटनार में करीब 697 करोड़ रुपये की लागत से 17 मीटर ऊंचा बैराज बनाया जाना है.
दोनों बैराजों का स्टीमेट करीब 850 करोड़ रुपए का बना, लेकिन विधानसभा चुनाव के दौरान छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन हुआ और अब प्रदेश में भाजपा सरकार को बने साल भर से ऊपर बीत गए हैं.
अब तक बैराज बनाने का काम शुरू नहीं हो सका है, जिसको लेकर कहा जा सकता है कि छत्तीसगढ़ की वर्तमान सरकार सूखती इंद्रावती नदी को बचाने को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है.
आंदोलनकारियों को सरकार से उम्मीद
इंद्रावती बचाओ आंदोलन से जुड़े किशोर पारख, संपत झा, पद्मश्री धर्मपाल सैनी का कहना है कि पिछले कई सालों से केंद्र और राज्य सरकार को जगाने के लिए बस्तर वासी इंद्रावती बचाने को लेकर आंदोलन करते आ रहे हैं.
इस बार प्रदेश में डबल इंजन की सरकार है ऐसे में सभी को उम्मीद है कि इस समस्या का समाधान होना चाहिए.
हलांकि सरकार को बने साल भर बीत चुके हैं, अब तक इस मामले में कोई प्रगति देखने को नहीं मिली है.
नदी में 2 मीटर गहराई पर पानी बह रहा
जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता वी.एन पांडे का कहना है कि वर्तमान में इंद्रावती नदी में 27% पानी बचा है.
कुछ साल पहले उड़ीसा और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच इंद्रावती नदी को लेकर हुए अनुबंध के तहत 50- 50 प्रतिशत पानी का बंटवारा करने का निर्णय लिया गया था.
लेकिन वर्तमान में बस्तर की इंद्रावती नदी में केवल 27% ही पानी नदी में है और केवल 2.01 मीटर की गहराई में बह रहा है.
पांडे का कहना है कि विभाग के द्वारा कोशिश की जा रही है. जोरा नाला के पास बने रेत के टीले की वजह से भी पानी में रुकावट आ रही है.
इसे जल्द ही हटाने का प्रयास भी किया जाएगा. जल संसाधन अधिकारी ने बताया कि मटनार और देउरगांव में बैराज बनाया जाना है.
बजट स्वीकृत नहीं हो पाने के चलते अब तक काम शुरू नहीं हो पाया है.
जल सरंक्षण मामले में छत्तीसगढ़ की तारीफ़
गौरतलब है कि बीते 19 फरवरी को राजस्थान के उदयपुर में आयोजित जल मंत्रियों के राज्यस्तरीय सम्मेलन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर पाटिल ने जल संरक्षण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ सरकार की तारीफ की थी.
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ जल संरचनाओ के निर्माण में पूरे देश मे अग्रणी स्थान पर है.
दूसरी तरफ बस्तर की प्राणदायनी इंद्रावती नदी जल संकट से जूझ रही है.