छत्तीसगढ़: कतरनों से खिलौने बना आत्मनिर्भर बन रहीं जनजातीय महिलाएं
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में ग्रामोद्योग विभाग और हथकरघा संघ की संयुक्त पहल के तहत राज्य की 'विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों' (PVTGs) की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी खिलौनों को बढ़ावा देने के विजन के अनुरूप, इस कार्यक्रम में महिलाओं को व्यर्थ या बेकार (वेस्ट) कपड़ों से खिलौने बनाने का हुनर सिखाया जा रहा है.
इन महिलाओं द्वारा तैयार किए गए खिलौनों और अन्य उत्पादों को 'कौशल' ब्रांड के नाम से ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से बाजार में बेचा जा रहा है.
ग्रामोद्योग सचिव राजेश राणा के अनुसार, प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन महिलाओं के घरों में सिलाई मशीनें लगाई जाएंगी और उन्हें कच्चा माल उपलब्ध कराया जाएगा. बाजार की मांग के आधार पर उन्हें सीधे ऑर्डर दिए जाएंगे, जिससे उन्हें नियमित रोजगार और आय मिल सकेगी.
इस योजना के पहले चरण में 30 महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है और आगे भी हर महीने 30-30 महिलाओं के समूहों को प्रशिक्षण देने की योजना है. वर्तमान में यह प्रशिक्षण रायपुर और जगदलपुर केंद्र में चल रहा है, जिसका जल्द ही सरगुजा, बिलासपुर और रायगढ़ जिलों में भी विस्तार किया जाएगा.
इस प्रशिक्षण से जुड़कर सुकमा और कोरबा जैसे सुदूर जिलों की शिक्षित लेकिन बेरोजगार महिलाएं काफी उत्साहित हैं. प्रतिभागियों का कहना है कि 15 दिनों के इस सत्र में उन्होंने सिलाई मशीन चलाने, चरखा कतने के साथ-साथ व्यर्थ कपड़ों से हाथी, चिड़िया, मछली, टेडी बियर और हेयर क्लिप जैसी आकर्षक चीजें बनाना सीखा है.
गांव में रोजगार के सीमित अवसरों के बीच यह पहल उनके जीवन में आर्थिक स्वावलंबन की एक नई उम्मीद लेकर आई है.