रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में सुपरस्पेशलिस्ट, पर सुविधाओं पर सवाल?
रायगढ़ । संवाददाता: राज्य सरकार के प्रेस विज्ञप्ति के हवाले से खबर है कि स्व. श्री लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति शासकीय चिकित्सालय रायगढ़ में दिवंगत अधिष्ठाता डॉ विनीत जैन के द्वारा किए गए प्रयासो के उपरांत शहर के सुप्रसिद्ध न्यूरोसर्जन डॉ नितीश नायक, यूरोसर्जन डॉ के.डी. खरे एवं नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. मीना पटेल सप्ताह में एक दिन चिकित्सा परामर्श देकर इलाज करेंगे.
रायगढ़ मेडिकल कॉलेज के ओपीडी में न्यूरोसर्जन, यूरोसर्जन तथा नेफ्रोंलॉजिस्ट सप्ताह में एक-एक दिन बैंठेंगे. इसकी घोषणा कर दी गई है. लेकिन लाख टके का सवाल है कि इन बीमारियों के ईलाज़ में जो मशीनें तथा ट्रेंड स्टाफ लगते हैं क्या उनकी भी नियुक्ति कर दी गई है.
क्या न्यूरोसर्जरी के लिये अलग ऑपरेशन थियेटर बनाया गया है, जहां सर्जरी की सभी सुविधायें उपलब्ध हैं. इसी के साथ न्यूरो आईसीयू बनाया गया है कि नहीं. इसी तरह न्यूरो जटिलताओं के जांच के लिये जो सीटी-स्कैन, ईईजी तथा एमआरआई की सुविधा भी आवश्यक है उसका क्या हाल है. क्या ये मशीनें हमेशा चालू हालत में रहती है? अन्यथा मरीजों को जांच के लिये प्राइवेट अस्पतालों को रुख करना पड़ेगा. इनके अभाव में केवल ओपीडी में परामर्श देने से क्या लाभ होगा. सरकारी मेडिकल कॉलेज में परामर्श के बाद मरीज, प्राइवेट अस्पतालों को रुख करेंगे.
नेफ्रोलॉजिस्ट का ज्यादातर काम ओपीडी से चल जाता है. लेकिन किडनी खराब होने पर डायलिसिस करानी पड़ती है. क्या डायलिसिस की मशीन भी रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध है. जानकारी मिली है कि उपलब्ध है. लेकिन क्या वह चालू हालत में है? क्या उसे चलाने वाले ट्रेंड स्टाफ हैं. क्या किडनी की जांच इस अस्पताल में होती है. गौरतलब है कि किडनी के खराब होने पर सप्ताह में करीब तीन बार डाइलिसिस करानी पड़ती है उसे कहां कराया जायेगा. यहां भी मरीज, प्राइवेट अस्पतालों को रुख करेंगे.
यही हाल, यूरो सर्जन का भी है. वे सप्ताह में एक दिन ओपीडी में बैठेंगे. लेकिन क्या यूरो सर्जरी की सुविधायें उपलब्ध है. कौन करेगा सर्जरी, इसकी जानकारी नहीं दी गई है. क्या यूरो सर्जरी में लगने वाला यूरोस्कोप रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध है. इसके लिये अलग ट्रेंड स्टाफ की भी जरूरत पड़ती है.
इन तमाम सुविधाओं तथा डॉक्टरों की लगातार अनुपस्थिति के कारण मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ेगा जहां ये सुविधायें उपलब्ध है. मरीजों को कुछ तो सुविधा मिलेंगी लेकिन प्राइवेट अस्पतालों के भी वारे-न्यारे हो जायेंगे.
बेशक, सरकार की पहलकदमी एक प्रशंसा के योग्य कदम है. उन्होंने अपनी तरफ से मरीजों को लाभ पहुंचाने के लिये पहलकदमी की है तथा सीमित संशाधनों में जितना संभव है उतना काम किया जा रहा है. पूरी नहीं तो कुछ तो राहत प्रदान करने की कोशिश की जा रही है. लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है कि यहां से मरीज प्राइवेट अस्पतालों का रुख करने के लिये मजबूर हो जायेंगे, क्योंकि उन्हें पूर्ण सुविधा चाहिये.
जरूरत इस बात की है कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में इन डॉक्टरों को नियमित रूप से नियुक्त किया जाये जिससे मरीजों को पूरी तरह से लाभ मिल सकें. उल्लेखनीय है कि यदि मरीजों को लाभ पहुंचाना है तो एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिये.