छत्तीसगढ़: आयुष्मान योजना का भुगतान प्रारंभ, 375 Cr की पहली किस्त जारी
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ राज्य में आयुष्मान भारत योजना अंतर्गत निजी अस्पतालों के लंबित क्लेम दावों के भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो गई है. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रयासों से वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु प्रावधानित राशि में से 375 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है.
राज्य सरकार ने दावा किया है कि वित्त विभाग द्वारा विमुक्ति आदेश जारी होने के साथ ही निजी अस्पतालों को उनके बकाया दावों का भुगतान होना शुरू हो गया है. इससे अस्पताल संचालकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है तथा आम नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाओं के सुचारू संचालन में लाभ मिलेगा.
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि शासन नागरिकों के हितों के प्रति सजग हैं और निजी अस्पतालों को राशि को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है.
उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं राज्य के प्राथमिक कार्यों में से है और लोकहित में मरीजों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए , शासन स्तर से अस्पतालों को भुगतान शुरू कर दिया गया है और शीघ्र ही समस्त बकाया राशि का भुगतान भी कर दिया जाएगा.
गौरतलब है कि पहले IMA की राज्य इकाई ने एक तरह से चेतावनी दी थी कि 21 अगस्त तक यदि सरकार द्वारा निजी अस्पतालों की बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया तो 1 सितंबर से प्रदेश के निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड से कैशलेस इलाज बंद किया जा सकता है.
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के रायपुर अध्यक्ष डॉक्टर कुलदीप सोलंकी ने बताया था कि पिछले मार्च महीने से राज्य के निजी अस्पतालों को आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज के बाद भुगतान नहीं किया गया है. यह राशि करीब 750 करोड़ रुपये है.
इसके अलावा पिछले वित्तीय वर्ष में भी कई अस्पतालों के करीब 150 करोड़ रुपये का भुगतान अटका है. इतनी बड़ी राशि का भुगतान नहीं होने के कारण छोटे और मध्यम स्तर के अस्पतालों के व्यवस्थित संचालन में दिक्कत हो रही है.
कई अस्पतालों में स्टाफ का भुगतान तक करना मुश्किल हो रहा था. ऐसे में आई एम ए और निजी अस्पताल संगठन से जुड़ी एक टीम ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और मंत्री से मुलाकात की थी.
इस मुलाकात के बाद मंत्री ने आश्वासन दिया था कि 31 अगस्त तक भुगतान कर दिया जाएगा.
अगर 31 अगस्त तक भुगतान नहीं होता है तो ऐसे में आने वाले महीने में निजी अस्पताल मजबूरन आयुष्मान भारत योजना के तहत कैशलेस इलाज बंद कर सकते हैं. इसका नुकसान गरीब और मध्यम आय वर्ग के लोगों को उठाना पड़ सकता है.