छत्तीसगढ़: 1,013 से अधिक LPG सिलेंडर जब्त, रायपुर बना जमाखोरी का गढ़
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में 18 मार्च तक 1,013 से अधिक एलपीजी सिलेंडर जब्त किए गए हैं. इस पूरी कार्रवाई में राजधानी रायपुर सबसे आगे है, जहां अकेले 13 मार्च को हुई छापेमारी में ही 392 घरेलू सिलेंडर बरामद किए गए थे. इसके बाद बिलासपुर का नंबर आता है, जहां 130 सिलेंडर जब्त किए गए हैं. दुर्ग और जगदलपुर जैसे शहरों में भी प्रशासन की टीमें गोदामों और संदिग्ध ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं. यह कार्रवाई आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और एलपीजी नियंत्रण आदेश, 2000 के कड़े प्रावधानों के तहत की जा रही है, ताकि कृत्रिम किल्लत पैदा करने वाले बिचौलियों पर लगाम कसी जा सके.
राज्य में इस समय 3.6 करोड़ उपभोक्ताओं के सामने गैस संकट गहराया हुआ है, जिसका मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में उपजा तनाव और उसके परिणामस्वरूप बाधित हुई आपूर्ति श्रृंखला है. जब डिजिटल बुकिंग प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप अत्यधिक मांग के कारण क्रैश होने लगे, तब प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए नए एलपीजी बुकिंग हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं.
बुकिंग के नियमों में भी बड़ा बदलाव किया गया है, जिसके तहत अब शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण इलाकों में 45 दिन के अंतराल पर ही सिलेंडर बुक किया जा सकेगा. यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि पैनिक बुकिंग को रोका जा सके और सीमित स्टॉक का समान वितरण सुनिश्चित हो सके. इसके साथ ही, जिन उपभोक्ताओं के पास पाइप नेचुरल गैस (पीएनजी) का कनेक्शन है, उन्हें अपने एलपीजी सिलेंडर सरेंडर करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वे सिलेंडर जरूरतमंद परिवारों तक पहुंच सकें.
छत्तीसगढ़ में वर्तमान में पांच एलपीजी बॉटलिंग प्लांट पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं, जिनमें इंडियन ऑयल के 2, हिंदुस्तान पेट्रोलियम के 2 और भारत पेट्रोलियम का 1 प्लांट शामिल है. सरकारी अधिकारियों का दावा है कि प्लांट में स्टॉक की कोई कमी नहीं है और उत्पादन निरंतर जारी है, लेकिन असली समस्या वितरण तंत्र में छिपी है.
रायपुर के खुले बाजार में व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत ₹4,500 तक पहुंच गई है, जो आधिकारिक दर से चार गुना अधिक है. यह स्थिति स्पष्ट करती है कि सिलेंडर बॉटलिंग प्लांट से तो निकल रहे हैं, लेकिन वे आम जनता के किचन तक पहुंचने के बजाय कालाबाजारी करने वालों के गोदामों में डंप हो रहे हैं.
उज्ज्वला योजना के लाभार्थी, जिन्होंने लकड़ी के धुएं से मुक्ति पाने के लिए गैस कनेक्शन लिया था, आज दोबारा पारंपरिक चूल्हों पर खाना बनाने को मजबूर हैं, जो इस संकट की सबसे दर्दनाक तस्वीर पेश करता है.
इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है. छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष के नेता चरणदास महंत और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार को घेरते हुए आपूर्ति बहाल करने की समय सीमा मांगी है. विपक्षी दलों का तर्क है कि केवल छापेमारी की तस्वीरें दिखाने से जनता का पेट नहीं भरेगा, बल्कि सरकार को पारदर्शी तरीके से यह बताना चाहिए कि स्टॉक कहां गायब हो रहा है.
हकीकत यह है कि छत्तीसगढ़ का पूरा वितरण ढांचा इस समय भारी दबाव में है. जानकारों का मानना है कि केवल छापेमारी इस समस्या का स्थाई समाधान नहीं है. जब तक गैस एजेंसियों के भीतर बैठे भ्रष्ट तत्वों और डिलीवरी चेन में मौजूद खामियों को दूर नहीं किया जाता, तब तक कालाबाजारी रोकना मुश्किल होगा.
1,013 सिलेंडरों की जब्ती एक महत्वपूर्ण कदम तो है, लेकिन यह केवल लक्षण का इलाज है, बीमारी का नहीं. सरकार को अब एक ऐसी दीर्घकालिक नीति पर काम करना होगा जो न केवल जमाखोरी को रोके, बल्कि वैश्विक उतार-चढ़ाव के बीच भी घरेलू उपभोक्ताओं को निरंतर और सस्ती ऊर्जा की गारंटी दे सके. फिलहाल, रायपुर से लेकर बस्तर तक की जनता केवल यही उम्मीद कर रही है कि उनके चूल्हे की नीली लौ जल्द वापस लौटेगी. Symbolic Photo