ननों की जमानत याचिका खारिज, हिरासत में रहेंगी
दुर्ग । संवाददाता: दुर्ग के सत्र न्यायालय ने कहा कि मानव तस्करी के आरोप राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अधिनियम के तहत आते हैं, इसलिये वह जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकता. ननों को बिलासपुर की एनआईए अदालत में अपील करने को कहा गया है. ननो पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 143 (मानव तस्करी) और छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 की धारा 4 (धार्मिक रूपांतरण) की धारायें लगाई गई हैं
गौरतलब है कि दुर्ग में केरल मूल की दो ननों, सिस्टर प्रीता मैरी और सिस्टर वंदना फ्रांसिस, को मानव तस्करी और जबरन धार्मिक रूपांतरण के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. दोनों नन फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. यह गिरफ्तारी 25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर स्थानीय बजरंग दल कार्यकर्ता रवि निगम की शिकायत के आधार पर हुई थी. इस घटना ने केरल में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है और इसका असर दिल्ली तक पहुंचा है.
नन नारायणपुर जिले की तीन आदिवासी महिलाओं को आगरा ले जा रही थीं, जहां उन्हें फातिमा अस्पताल में प्रशिक्षण और नौकरी का अवसर मिलना था. इन महिलाओं और उनके परिवारों ने स्पष्ट किया है कि कोई जबरन धार्मिक रूपांतरण नहीं हुआ और वे अपनी मर्जी से जा रही थीं.
केरल में सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट, विपक्षी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, ईसाई समुदाय और चर्च के नेताओं ने गिरफ्तारी की निंदा की है. केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इसे "झूठी शिकायत" पर आधारित "जानबूझकर उत्पीड़न" करार दिया और भाजपा व उसके वैचारिक सहयोगियों पर ईसाई समुदाय के प्रति पक्षपात का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "जो लोग क्रिसमस पर केक लेकर ईसाई घरों में जाते हैं, वही अब ननों के पीछे पड़े हैं."
वहीं, वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने ननों के साथ दुर्व्यवहार की निंदा की और कहा कि यह अल्पसंख्यकों पर हमला है. उन्होंने कहा, "महिलाओं के साथ बदसलूकी नहीं होनी चाहिये. ऐसी अत्याचारों का अंत होना चाहिये."
केरल बीजेपी प्रमुख राजीव चंद्रशेखर ने ननों के समर्थन में कहा कि यह गिरफ्तारी "गलतफहमी" का नतीजा है और पार्टी उनके साथ खड़ी है.
ईसाई संगठनों और नेताओं ने बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर हमले और दबाव डालने का आरोप लगाया है.
तिरुवनंतपुरम के आर्कबिशप कार्डिनल बेसिलियोस क्लीमिस ने कहा कि ननों को जमानत न मिलना समुदाय को यह सोचने पर मजबूर करता है कि इन कार्रवाइयों के पीछे क्या मंशा है.
उन्होंने कहा, "नेताओं और राजनीतिक दलों के शब्द और कार्य एक-दूसरे के विपरीत नहीं होने चाहिये."
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से चल रही है और राज्य में नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि है.
केरल के सांसदों ने संसद के बाहर प्रदर्शन कर ननों की रिहाई की मांग की और छत्तीसगढ़ सरकार पर ईसाई समुदाय को निशाना बनाने का आरोप लगाया.