केरल नन: बेल पर फैसला सुरक्षित, सरकारी वकील ने किया बेल का विरोध
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक विशेष एनआईए कोर्ट ने शुक्रवार (01 अगस्त 2025) को केरल की दो नन सहित तीन लोगों की जमानत याचिका पर अपना फैसला शनिवार तक के लिये सुरक्षित रख लिया. सरकारी वकील डी चंद्रवंशी ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामला अभी जांच के प्रारंभिक चरण में है.
सुनवाई प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश (एनआईए कोर्ट) सिराजुद्दीन कुरैशी के समक्ष हुई.
केरल की नन प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस के साथ-साथ सुखमन मंडावी को 25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर रेलवे पुलिस ने गिरफ्तार किया था.
यह गिरफ्तारी एक स्थानीय बजरंग दल कार्यकर्ता की शिकायत के आधार पर हुई, जिसमें उन पर नारायणपुर की तीन लड़कियों को जबरन धर्मांतरण और मानव तस्करी का आरोप लगाया गया था.
बचाव पक्ष के वकील अमृतो दास ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने पूछताछ के लिए उनकी हिरासत की मांग नहीं की थी, और कथित पीड़ित लड़कियों को उनके घर वापस भेज दिया गया है.
उन्होंने कोर्ट में तर्क दिया, "वे सभी बालिग हैं और पहले से ही ईसाई धर्म का पालन कर रही थीं, इसलिये धर्मांतरण का आरोप झूठा है." उन्होंने आगे कहा कि तीनों लड़कियों के माता-पिता ने पुलिस को बताया है कि उनकी बेटियों को न तो जबरन और न ही धोखे से ले जाया जा रहा था.
इस मामले को लेकर विपक्षी दलों ने इस सप्ताह संसद में भी हंगामा किया.
शुक्रवार (01 अगस्त 2025) को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल केरल से रायपुर पहुंचा और दोनों नन से मुलाकात की.
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने आरोप लगाया कि दुर्ग सत्र न्यायालय द्वारा मामले को एनआईए कोर्ट में भेजना एक साजिश थी ताकि उन्हें तत्काल जमानत न मिल सके.