माओवादियों को अल्टीमेटम, केवल 31 जनवरी' 2026 तक सरेंडर सुविधा मिलेगी
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक जंग अब अपने सबसे कड़े दौर में पहुंच गई है. राज्य सरकार ने माओवादियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे जनवरी 2026 के आखिरी सप्ताह तक हथियार डाल दें, अन्यथा समर्पण और पुनर्वास नीति (Surrender and Rehabilitation Policy-2025) के तहत मिलने वाले तमाम लाभ हमेशा के लिए बंद कर दिए जाएंगे.
इस समय सीमा के बाद सरकार अपनी रणनीति को पूरी तरह 'फोर्स-एलईडी' आक्रामक अभियान में बदल देगी, जिसके तहत माओवादी ठिकानों में घुसकर उन्हें पूरी तरह ध्वस्त किया जाएगा.
गृह विभाग के सूत्रों के अनुसार, समर्पण का यह अवसर सीमित है और सरकार अब इसे अनिश्चित काल तक जारी रखने के पक्ष में नहीं है.
वर्तमान में आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को नकद प्रोत्साहन, व्यावसायिक प्रशिक्षण, रोजगार सहायता और आवास जैसी सुविधाएं दी जाती हैं, लेकिन जनवरी के बाद यह 'विंडो' बंद हो सकती है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा देश से वामपंथी उग्रवाद को खत्म करने के लिए 31 मार्च 2026 की समय सीमा तय किए जाने के बाद बस्तर में सुरक्षा बलों का दबाव बढ़ गया है.
पिछले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में रिकॉर्ड संख्या में माओवादी मारे गए हैं और हजारों ने आत्मसमर्पण किया है. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 तक बस्तर संभाग में 473 से अधिक माओवादी ढेर किए जा चुके हैं, जबकि 2,354 ने सरेंडर किया है.
बस्तर आईजी पी. सुंदरराज ने स्पष्ट किया है कि समर्पण नीति को बंद करने का अंतिम निर्णय सरकार का होगा.
आगामी तीन महीनों (जनवरी से मार्च 2026) के लिए राज्य सरकार ने एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है, जिसमें पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर संयुक्त ऑपरेशन्स चलाए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर बस्तर में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती भी की जाएगी.
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