ईसाई धर्म अपनाने वाले शख्स के शव को दफनाने से रोका
कांकेर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के कोडेकुरसे गांव में एक 50 वर्षीय ईसाई धर्म अपनाने वाले मनीष निषाद के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. ग्रामीणों ने उनके शव को गांव की सीमा के भीतर दफनाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है, जिसके चलते उनका परिवार पिछले तीन दिनों से शव को अलग-अलग गांवों के बीच ले जाने के लिए मजबूर है और अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है.
मनीष निषाद का मंगलवार को रायपुर में इलाज के दौरान निधन हो गया था. जब उनका परिवार अंतिम संस्कार के लिए उनके निजी ज़मीन पर शव को लेकर आया, तो ग्रामीणों ने यह कहते हुए आपत्ति जताई कि जिन लोगों ने पारंपरिक आस्था छोड़ दी है, उन्हें गांव की सीमा के भीतर दफनाया नहीं जा सकता.
गतिरोध के बाद पुलिस ने हस्तक्षेप किया, लेकिन शांति समझौता कराने में विफल रही. इसके बाद ईसाई समुदाय ने कोडेकुरसे पुलिस स्टेशन को घेर लिया और शव को दफनाने के अधिकार की मांग की. पुलिस बाद में शव को कोडेकुर से अस्पताल के मुर्दाघर में ले गई.
शुक्रवार को, परिवार ने पुलिस टीम के साथ शव को चरामा ले जाने की कोशिश की, ताकि शांतिपूर्ण दफ़न हो सके. हालांकि, एक हिंदू संगठन के सदस्यों ने वाहन को रोक दिया और अंतिम संस्कार को बाधित करने की बात कही. तनाव बढ़ने पर शव को रायपुर वापस लाया गया, जहां निषाद की मृत्यु के तीसरे दिन भी वह अनिश्चितता के कारण दफन नहीं हो पाया है.
चरामा के पास्टर मोहन ग्वाल ने कहा, "हम केवल उनकी निजी ज़मीन पर उन्हें दफनाना चाहते थे. कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है. प्रशासन ने कोई पहल नहीं की है. यह पहली घटना नहीं है, लेकिन जब तक ज़मीन उपलब्ध नहीं कराई जाती, हम उन्हें कहीं और नहीं दफनाएंगे."
वहीं, जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र टेकाम ने ग्रामीणों के रुख को सही ठहराते हुए कहा, "कोडेकुरसे पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करता है. समुदाय की अपनी दफन प्रणाली है. यदि शव को दफनाया जाना है, तो इसे गांव की परंपरा का पालन करना चाहिए अन्यथा, इसे गांव के बाहर ले जाना चाहिए."
एक अन्य ग्रामीण रघुनंदन गोस्वामी ने जोड़ा, "उन्होंने अपना मूल धर्म छोड़ दिया. हमने प्रशासन को बताया कि जब तक वे पुरानी आस्था में वापस नहीं आते, हम यहां दफनाने की अनुमति नहीं देंगे. यह एक पांचवीं अनुसूची क्षेत्र है, और हम अपने रीति-रिवाजों का पालन कर रहे हैं."
प्रोग्रेसिव क्रिश्चियन अलायंस के राज्य समन्वयक साइमन डिगबाल टांडी ने बताया कि कांकेर में दो ईसाई कब्रिस्तान हैं, लेकिन जगह की कमी और ग्राम सभा की आपत्तियों के कारण वे अब दफन स्वीकार नहीं कर रहे हैं.
2023 में ईसाई समुदाय को आवंटित ज़मीन का एक प्लॉट भी विवादों में घिरा हुआ है. टांडी ने कहा, "जहां ज़मीन आवंटित की गई थी, वहां भी स्थानीय पंचायतों ने आपत्ति जताई है. प्रशासन एक स्थायी समाधान प्रदान करने में विफल रहा है."