HC: बर्खास्त पूर्व नौसैनिक फूड इंस्पेक्टर बहाल
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पूर्व भारतीय नौसेनाकर्मी प्रहलाद प्रसाद राठौर को बड़ी राहत देते हुए खाद्य निरीक्षक के पद पर उनकी बर्खास्तगी को रद्द कर दिया है. और उन्हें तत्काल सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है.
कोर्ट ने पाया कि उनके खिलाफ दर्ज मामूली आपराधिक मामले लगभग दो दशक पहले बचपन के पड़ोस के विवाद से उपजे थे और लोक अदालत में सुलझा लिए गए थे.
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस विभु दत्त गुरु की खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश को खारिज करते हुए कहा कि बचपन में किए गए ऐसे कृत्यों के आधार पर किसी व्यक्ति को सेवा से अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है.
40 वर्षीय राठौर ने भारतीय नौसेना में 15 साल की अनुकरणीय सेवा की थी, जिसके बाद वह भूतपूर्व सैनिक कोटे के माध्यम से 2018 में खाद्य निरीक्षक के रूप में राज्य सरकार की सेवा में शामिल हुए. उनके नौसेना रिकॉर्ड में कई "बहुत अच्छे" मूल्यांकन और पुरस्कार दर्ज थे.
हालांकि, 15 मार्च 2024 को पुलिस सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर उनकी सेवा समाप्त कर दी गई थी, जिसमें 2002 में नाबालिग रहते हुए उनके खिलाफ दर्ज दो पड़ोस के विवादों से संबंधित आपराधिक मामलों का हवाला दिया गया था.
ये दोनों मामले 2007 तक लोक अदालत में सुलझा लिए गए थे. एकल पीठ ने पहले बर्खास्तगी को बरकरार रखा था, क्योंकि उन्होंने सत्यापन फॉर्म में इन मामलों का खुलासा नहीं किया था.
खंडपीठ ने अपने निर्णय में किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 24(1) पर जोर दिया, जिसके तहत बचपन में किए गए अपराधों से जुड़ी सभी अयोग्यताएं समाप्त हो जाती हैं, और व्यक्ति को बाद में जीवन में इन कृत्यों के लिए दंडित नहीं किया जा सकता है.
पीठ ने कहा कि लंबे समय से सुलझे हुए और मामूली मामलों पर भरोसा करके अपीलकर्ता के चरित्र को "अयोग्य" घोषित करना मनमाना और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है.
उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी हवाला दिया और उनकी बेदाग 15 साल की नौसेना सेवा को उनकी सार्वजनिक सेवा के लिए ईमानदारी और योग्यता का प्रमाण माना. कोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश को रद्द करते हुए राठौर को सभी परिणामी लाभों के साथ सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है.