HC: ससुर से गुजारा भत्ता पाने की हकदार है विधवा बहू
HC: ससुर से गुजारा भत्ता पाने की हकदार विधवा बहू
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में दोहराया है कि यदि विधवा बहू के पास स्वतंत्र आय नहीं है और उसे अपने मृत पति की संपत्ति से कोई हिस्सा नहीं मिला है, तो वह अपने ससुर से गुजारा भत्ता मांगने की हकदार है.
जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की खंडपीठ ने कोरबा के तुलाराम यादव की अपील को खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें तुलाराम को अपनी विधवा बहू चंदा यादव और उनके दो बच्चों के लिए प्रति माह 2,500 रुपये देने का निर्देश दिया गया था.
हाईकोर्ट ने हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 19 का हवाला देते हुए कहा कि विधवा का गुजारा भत्ता पाने का अधिकार इस शर्त पर निर्भर करता है कि वह अपनी आय, पति की संपत्ति, माता-पिता या बच्चों की संपत्ति से अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ हो.
ऐसी स्थिति में, विशेष रूप से जब ससुर के पास संयुक्त परिवार की संपत्ति हो और विधवा को उसमें से कोई हिस्सा न मिला हो, तो ससुर की जिम्मेदारी बनती है.
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि संयुक्त हिंदू परिवार का प्रबंधक न केवल पुरुष सदस्यों, बल्कि उनकी मृत्यु के बाद उनकी विधवाओं और बच्चों का भरण-पोषण करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है.
खंडपीठ ने पहले के फैसलों का हवाला देते हुए कहा, “किसी पुरुष सदस्य की मृत्यु पर, प्रबंधक उसकी विधवा और बच्चों का भरण-पोषण करने के लिए बाध्य है.”
इस मामले में, चंदा यादव, जो 2014 में विधवा हो गई थीं, ने अपने ससुराल वालों द्वारा दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए गुजारा भत्ता मांगा था.
फैमिली कोर्ट ने पाया कि चंदा के ससुर को 12,000 रुपये मासिक पेंशन मिलती है और उनके पास जमीन भी है, जबकि चंदा के पास आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं है.
इसलिए, कोर्ट ने ससुर को चंदा के पुनर्विवाह तक प्रति माह 2,500 रुपये देने का आदेश दिया.