छेड़छाड़ के दोषी की 2 साल की सजा छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने रखी बरकरार
महासमुंद के सोनमुंडी गांव में 2011 में हुई छेड़छाड़ के मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए दोषी की अपील खारिज कर दी है.
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 13 वर्षीय किशोरी की गरिमा को ठेस पहुंचाने और लगातार प्रताड़ित करने के मामले में एक व्यक्ति की दो साल की सख्त कैद की सजा को सही ठहराया है. अदालत ने आरोपी की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को बरकरार रखा है. पीड़िता ने इस उत्पीड़न से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी.
न्यायमूर्ति सुधीर कुमार ने 15 अक्टूबर को याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि महासमुंद के सत्र न्यायाधीश द्वारा भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 के तहत दी गई सजा पूरी तरह से तर्कसंगत और साक्ष्यों पर आधारित है.
आरोपी ने सत्र न्यायालय के 31 दिसंबर 2011 के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उस पर दो साल की जेल के साथ 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था. हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने उसे आत्महत्या के लिए उकसाने (धारा 306 IPC) के आरोप से बरी कर दिया था.
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना महासमुंद जिले के सोनमुंडी गांव में 7 जुलाई 2011 को घटी थी. प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित लड़की की मां की गवाही से यह साबित हुआ कि आरोपी किशोरी को लगातार परेशान करता था. पानी भरने के दौरान आरोपी द्वारा उसके कपड़े खींचने की घटना भी सामने आई थी. इस संबंध में गांव में एक बैठक बुलाकर आरोपी को चेतावनी भी दी गई थी, लेकिन उसकी हरकतों में कोई सुधार नहीं आया.
उच्च न्यायालय ने चश्मदीदों के बयानों और सामाजिक बैठक के साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए दोषी की जमानत रद्द कर दी है. कोर्ट ने उसे अगले 30 दिनों के भीतर ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण कर अपनी बची हुई सजा पूरी करने का निर्देश दिया है.