'स्वच्छ भारत' के पीछे का कड़वा सच, रायपुर के हजारों सफाईकर्मी बुनियादी सुविधाओं से वंचित
'स्वच्छ भारत' की नींव मजबूत करने वाले रायपुर के सफाईकर्मी खुद पहचान, सुरक्षा और हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं. SHRC के लिए लॉ इंटर्न्स द्वारा किए गए विस्तृत सर्वे ने ठेकेदारों के शोषण और सरकारी सुविधाओं से वंचित हजारों मजदूरों का कड़वा सच उजागर कर दिया है.
रायपुर । संवाददाता: देश को स्वच्छ बनाने का जिम्मा उठाने वाले सफाईकर्मियों की खुद की जिंदगी बदहाली के साए में कट रही है. छत्तीसगढ़ राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) द्वारा कराए गए एक विशेष सर्वे में रायपुर के सफाईकर्मियों की दयनीय स्थिति उजागर हुई है.
इस सर्वे की सबसे खास बात यह रही कि इसे प्रशासनिक अधिकारियों के बजाय करीब 500 कानून (लॉ) के छात्रों ने पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर अंजाम दिया है. नौ महीने तक चले इस जमीनी सर्वे में लगभग 8,000 सफाईकर्मियों की स्थिति का आकलन किया गया, जिसकी रिपोर्ट अब रायपुर और बिलासपुर जिला प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई के लिए सौंप दी गई है.
मानवाधिकार आयोग के इस अध्ययन से पता चला है कि 'स्वच्छ भारत' मिशन की रीढ़ माने जाने वाले कई कर्मी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं.
सर्वे में शामिल 336 कर्मियों के घरों में शौचालय तक नहीं हैं, जबकि 749 मजदूर बिना किसी सुरक्षा और स्वच्छता किट के काम करने को मजबूर हैं.
पहचान पत्रों और सरकारी योजनाओं के लाभ से दूरी भी एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है; 1,907 कर्मियों के पास वोटर आईडी, राशन कार्ड या आयुष्मान कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज नहीं हैं. वहीं, 2,387 वर्कर प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से पूरी तरह वंचित हैं.
आयोग की इस रिपोर्ट ने ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे आर्थिक शोषण की परतें भी खोल दी हैं. सर्वे के अनुसार, 1,076 मामलों में ठेकेदारों ने मजदूरों के एटीएम कार्ड और पासबुक अपने पास जब्त कर रखे हैं, ताकि कमीशन के नाम पर उन्हें तय से कम मजदूरी दी जा सके.
मजबूरी और तंगी के कारण मजदूर इन अन्यायपूर्ण शर्तों को स्वीकार करने पर मजबूर हैं. इसके अलावा, कई परिवारों में बुजुर्गों व विधवाओं को पेंशन न मिलने और युवाओं में नशे की लत जैसी समस्याएं भी सामने आई हैं. आयोग का मुख्य उद्देश्य इन छुपे हुए मुद्दों पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना है ताकि इन सफाईकर्मियों को उनका वाजिब हक और सम्मान मिल सके.