हिड़मा का सरेंडर प्लान? साले ने एनकाउंटर को कहा धोखा!
हिडमा का सरेंडर प्लान? साले ने एनकाउंटर को ठहराया धोखा!
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बस्तर के घने जंगलों में माओवादी कमांडर माड़वी हिड़मा और उसकी पत्नी राजे की मौत ने नक्सलवाद के एक लंबे दौर को विराम दे दिया है. सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह सफलता इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त भारत का सपना हिडमा जैसे कुख्यात नक्सली की मौजूदगी से खतरे में पड़ चुका था. लेकिन इस एनकाउंटर ने नई बहस छेड़ दी है, जहां सोशल मीडिया में सवालों का दौर चल रहा है.
हिड़मा के साले ललित ने अंत्येष्टि के ठीक दौरान पत्रकारों से खुलासा किया कि उनका जीजा सरेंडर की कगार पर था. आंध्र प्रदेश पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने की तैयारी चल रही थी, मगर उसे चकमा देकर मार दिया गया.
ललित का दावा है कि घटनास्थल पर आंध्र के कई बड़े नक्सली सरगना भी छिपे थे, जिन्हें स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षित निकाल लिया, जबकि बस्तर के नक्सलियों को निशाना बनाया गया.
कुछ ही दिन पहले छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने पूवर्ती जाकर हिडमा और देवा की मां से मुलाकात की थी. उन्होंने भोजन के दौरान दोनों नक्सलियों से समर्पण की अपील की, जो वायरल वीडियो में साफ दिखी. मां की भावुक पुकार के बाद हिड़मा के सरेंडर की अफवाहें तेज हो गईं, लेकिन ललित के मुताबिक, यही वह पल था जब धोखे की साजिश रची गई.
उधर, अल्लूरी सीताराम राजू जिले के एसपी अमित बरदार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि जंगल में हिड़मा पूरी तरह अजनबी था. यहां उसकी विचारधारा को समर्थन न मिलना स्वाभाविक था, न ही वह इलाके की भौगोलिक समझ बना पाया. दोहरी सुरक्षा घेराबंदी के कारण ऑपरेशन लंबा खिंचा, वरना यह और फटाफट निपट जाता. एसपी का मानना है कि ऐसे आरोप तो उठते ही रहते हैं, लेकिन सच्चाई अलग है.