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छत्तीसगढ़: रात के अंधेरे में भी हाथियों को ट्रैक करेगा हाई-टेक AI ड्रोन

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19 फ़र. 2026, 06:30 AM 2 मिनट में पढ़ें 1

हाथी
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रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के जंगलों में हाथियों और इंसानों के बीच होने वाले द्वंद्व को कम करने के लिए वन विभाग ने तकनीक का सहारा लिया है. उदंती सीता नदी टाइगर रिजर्व में अब एआई-सक्षम थर्मल ड्रोन का उपयोग शुरू किया गया है, जो घने जंगलों के बीच रात के अंधेरे में भी हाथियों की सटीक लोकेशन और उनकी शारीरिक बनावट को ट्रैक करने में सक्षम है. 


अक्सर रात के समय पारंपरिक ड्रोन विफल हो जाते हैं, लेकिन यह नया थर्मल ड्रोन हाथियों के शरीर की गर्मी (हीट सिग्नेचर) को पहचान कर उनकी गिनती और उनके व्यवहार का विश्लेषण कर सकता है. डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन के अनुसार, यह तकनीक विशेष रूप से उन हाथियों की पहचान करने में मददगार साबित होगी जो अक्सर बस्तियों के करीब जाकर फसलों को नुकसान पहुँचाते हैं.


लगभग 9 लाख रुपये की लागत वाला यह कस्टमाइज्ड ड्रोन लेजर रेंज फाइंडर से लैस है, जो हाथी के दांतों के आकार, पूंछ की लंबाई और कान की बनावट जैसे डेटा को सेंटीमीटर-स्तर की सटीकता के साथ मापता है. 


यह ड्रोन एक बार में 45 मिनट तक उड़ान भर सकता है और 500 मीटर की ऊंचाई से बिना वन्यजीवों को परेशान किए उनकी निगरानी कर सकता है. 


इस तकनीक का उपयोग न केवल हाथियों की मैपिंग के लिए, बल्कि शिकार रोकने और जल निकायों की निगरानी के लिए भी किया जाएगा. 


वर्तमान में धरमजयगढ़ और कटघोरा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी इसे तैनात किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को हाथियों के आने की पूर्व सूचना देकर जनहानि और फसल के नुकसान को रोका जा सके.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP