हाईकोर्ट ने चाकू बिक्री पर लिया स्वतः संज्ञान, गृह सचिव को बनाया पक्षकार
HC ने चाकू बिक्री पर लिया स्वतः संज्ञान, गृह सचिव को बनाया पक्षकार
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर में तेज हथियारों की खुली और अनियंत्रित बिक्री से संबंधित एक समाचार रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका शुरू की और छत्तीसगढ़ सरकार के गृह विभाग के प्रमुख सचिव को पक्षकार के रूप में शामिल करने और इस मामले में व्यक्तिगत हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है.
यह कार्यवाही 14 अगस्त 2025 को प्रकाशित दैनिक भास्कर के समाचार पर आधारित है, जिसका शीर्षक था, "हथियारों का खुला बाजार – 100 से 500 रुपये में आसानी से उपलब्ध डिजाइनर चाकू, भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा". इस रिपोर्ट में बिलासपुर के विभिन्न दुकानों में बटन चाकू और नक्कल डस्टर जैसे तेज हथियारों की आसान उपलब्धता का खुलासा किया गया.
रिपोर्ट के अनुसार, एक स्टिंग ऑपरेशन में पान की दुकानों, जनरल स्टोर्स और गिफ्ट शॉप्स से बिना किसी सवाल-जवाब के चाकू खरीदे गए. समाचार में कहा गया, "एक जनरल स्टोर पर, टीम ने तीन चाकू खरीदे, जिनमें एक तेज और पतला फोल्डिंग चाकू शामिल था, यह कहकर कि यह स्कूल ड्रामा के लिए है." भुगतान यूपीआई के माध्यम से किया गया. समाचार में यह भी दावा किया गया कि "रसोई चाकू और ओपनर के नाम पर घातक हथियार खुले तौर पर बेचे जा रहे हैं."
न्यायालय ने समाचार में दी गई बिलासपुर में हिंसक अपराधों की चिंताजनक जानकारी पर ध्यान दिया, जिसमें कहा गया कि शहर में "सिर्फ सात महीनों में 120 छुरेबाजी की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें सात लोगों की मृत्यु हुई और 122 लोग घायल हुए."
कोर्ट की टिप्पणियां और विश्लेषण
समाचार रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद, हाईकोर्ट ने सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई. आदेश में कहा गया, "उक्त समाचार रिपोर्ट से पता चलता है कि तेज हथियार स्थानीय दुकानों जैसे पान की दुकानों, जनरल स्टोर्स और गिफ्ट शॉप्स में बिना किसी उचित जांच या नियमन के आसानी से उपलब्ध हैं."
खंडपीठ ने आगे कहा, "समाचार से यह भी पता चलता है कि दुकानदार बिना सवाल किए या खरीदार के इरादों की जांच किए, नाबालिगों सहित किसी को भी चाकू बेचने को तैयार हैं. इस तरह की निगरानी और नियमन की कमी हिंसक घटनाओं, जैसे छुरेबाजी, में वृद्धि का कारण बन सकती है और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा करती है."
कोर्ट ने इन हथियारों की आसान उपलब्धता और अपराधों में वृद्धि के बीच संबंध को भी रेखांकित किया, जिसमें कहा गया, "ऑनलाइन और स्थानीय दुकानों में चाकुओं की आसान उपलब्धता इस समस्या को और बढ़ा रही है. अधिकारियों ने आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की है, लेकिन इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए अधिक प्रभावी रणनीति की आवश्यकता है. इसलिए, तेज हथियारों के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त नियम और प्रवर्तन जरूरी हैं."
सुनवाई के दौरान, छत्तीसगढ़ के महाधिवक्ता प्रफुल्ल एन. भारत ने बताया कि ऑनलाइन वेबसाइटों पर इस तरह के चाकुओं की बिक्री के संबंध में कार्रवाई की गई है. समाचार में प्रकाशित दुकानदार की तस्वीर के बारे में, महाधिवक्ता ने निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा.
मामले को महत्वपूर्ण जनहित का मानते हुए, हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार के गृह विभाग के प्रमुख सचिव को पक्षकार के रूप में शामिल करने का आदेश दिया. आदेश में कहा गया, "चूंकि पुलिस विभाग सीधे राज्य के गृह विभाग के नियंत्रण में है, इस कोर्ट को यह उचित लगता है कि छत्तीसगढ़ सरकार के गृह विभाग के प्रमुख सचिव, रायपुर, को पक्षकार नंबर 6 के रूप में शामिल किया जाए, जो उक्त समाचार के संबंध में और इस तरह के चाकुओं की आसान बिक्री को रोकने के लिए उठाए गए कदमों के संबंध में अपना व्यक्तिगत हलफनामा दायर करें."