10 Cr के GST धोखाधड़ी मामले में आरोपी को जमानत
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 10 करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार एक आरोपी को जमानत दे दी है. यह धोखाधड़ी कथित तौर पर गैर-वास्तविक लेनदेन के माध्यम से सीजीएसटी अधिनियम, 2017 के तहत की गई थी.
आरोपी, विनय कुमार टंडन, एम/एस ओविया ट्रेडर्स के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता हैं. उन पर बिना किसी वास्तविक सामान की आवाजाही के फर्जी तरीके से आईटीसी का दावा करने का आरोप है, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ.
यह जानबूझकर की गई धोखाधड़ी और तथ्यों को छिपाने का मामला है, जो सीजीएसटी अधिनियम की कई दंडात्मक धाराओं के तहत कठोर सजा है.
आरोपी की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि टंडन को झूठा फंसाया गया है और मामला दस्तावेजी साक्ष्य और कर संबंधी विसंगतियों से जुड़ा है, जो आपराधिक इरादे के बजाय रिकॉर्ड-कीपिंग की समस्या है.
उन्होंने कहा कि सारा सबूत दस्तावेजी है और पहले ही जब्त किया जा चुका है, आरोपी ने जांच में पूरा सहयोग किया है, और हिरासत में पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है. टंडन 28 मार्च, 2025 से लंबे समय तक हिरासत में हैं, और वकील ने समान मामलों में जमानत के उदाहरण भी पेश किये.
राज्य ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह एक गंभीर आर्थिक अपराध है, जो सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाता है और इसमें फर्जी फर्मों और नकली चालानों का उपयोग शामिल है.
अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि जमानत देने से व्यापक जांच प्रभावित हो सकती है और जीएसटी धोखाधड़ी के खिलाफ निवारक प्रभाव कमजोर पड़ सकता है.
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता पहले ही काफी समय जेल में बिता चुका है और मुकदमे में अभी समय लगेगा, इसलिए आगे की हिरासत जरूरी नहीं है.
हालांकि, शिकायत दर्ज होने और जांच जारी रहने के बावजूद, अदालत ने सख्त शर्तों के साथ जमानत दी. इन शर्तों में व्यक्तिगत बांड, दो स्थानीय जमानतदार, और मुकदमे में सहयोग की गारंटी के लिए कई उपक्रम शामिल हैं.
आरोपी को विशेष रूप से महत्वपूर्ण सुनवाई की तारीखों पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और कार्यवाही में देरी के लिए स्थगन की मांग न करने का निर्देश दिया गया, अन्यथा जमानत का दुरुपयोग माना जा सकता है.
आरोपी की ओर से अधिवक्ता किशोर भदुरी और हर्ष दवे ने पैरवी की, जबकि विभाग की ओर से श्री मनीष शर्मा, डीएसजीआई उपस्थित हुये.